श्रीमद्भागवत : भगवान ने गोवर्धन पर्वत उठाकर मूसलाधार वर्षा से ब्रजवासियों के प्राणों की रक्षा की

घनश्याम पाण्डेय/विनीत शर्मा(संवाददाता)

चोपन। स्थानीय सिंदुरिया गांव में हनुमान प्रसाद पाण्डेय के द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पंचम दिवस पर कथा वाचक श्री शारदा नंदन जी ने कहा कि कंस के कारागार में भगवान श्रीकृष्ण का अवतार अद्भुत रूप में हुआ हाथ में शंख चक्र गदा पद्म धारण किए मां ने बाल रूप में दर्शन देने का आग्रह किया त्रिभुवन को अपने इशारों पर नचाने वाले त्रिभुवन के स्वामी मां के आदेश पर नाचने लगे और बालक रूप में आकर रुदन करने लगे।

उस समय कारागार के सभी पहरेदार गहरी नींद में सो गये बेड़ियां खुल गई जेल के फाटक स्वयं खुल गया और वासुदेव जी उन्हें लेकर ब्रज के लिए प्रस्थान कर गए जहां गोकुल के ग्वाला समाज के मुखिया नंदबाबा के घर पुत्री के रूप में योगमाया का जन्म हुआ था जिसे लेकर बासुदेव चले आए उसके रोने की आवाज सुनाई दी तो पहरेदार जग गये और पुत्री को कंस के हवाले कर दिया जब कंस ने उसे मारना चाहा तो उसके हाथ से निकल कर आकाश की ओर चली गई और नभवाणी हुई कि तुम्हे मारने वाला गोकुल में अवतार लिया है और जा कर विंध्याचल में गिरी और मां विंध्यवासिनी के रूप में सुविख्यात हैं।

इधर नंदबाबा की बहन सुनंदा ने बाबा को पुत्र होने का समाचार सुनाई और ब्रज में उत्सव वधाव होने लगा। यदुवंशियों के कुलपुरोहित गर्गाचार्य ने वासुदेव जी के प्रेरणा से गोकुल में पधारे और नामकरण के लिए रोहिणी के पुत्र का नाम रौहिणेय और उनका दूसरा नाम बलराम और यशोदा के लाल का नाम श्रीकृष्ण रखा। गोवर्धन पूजा और अन्नकूट महोत्सव पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रकृति की सुरक्षा और गौसंवर्धन से गोवर्धन पूजा का संबंध है इसी लिए भगवान ने अपनी छोटी अंगुली से गोवर्धन पर्वत उठाकर सात दिनों तक चलने वाली मूसलाधार वर्षा से गौ माता और ब्रजवासियों के प्राणों की रक्षा करके इंद्र का मान मर्दन किया।

उसके बाद ब्रजवासियों के द्वारा अन्नकूट महोत्सव करने के बाद छप्पन प्रकार का भोग लगाकर प्रसाद ग्रहण किया। भगवान की बाल लीलाओं में मक्खन चोरी वन गाय चराने की रोचक प्रसंग प्रस्तुत किया।


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