श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करने से और कराने से सभी जीवों को मुक्ति मिलती है।

घनश्याम पाण्डेय/विनीत शर्मा(संवाददाता)

चोपन। सिंदुरिया गांव में शहनुमान प्रसाद पाण्डेय द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में कथा वाचक श्री शारदा नंद जी महाराज ने कहा कि इस युग में हर जीव सुख शांति तो चाहता है किंतु जिसका नाम लेने से सुख शांति व भक्ति मिलेगी उस नाम को नहीं लेता वह नाम है सर्वेश्वरी श्री राधा रानी का नाम जिस जिह्वा पर श्री राधा रानी का नाम होगा उस जीव की सारी विपत्तियां, कठिनाईयां स्वत: नष्ट हो जाएंगी।

एक विद्वान ब्राह्मण धर्मदेव की पत्नी धुंधुली के द्वारा पति की इच्छानुसार एक संत के द्वारा पुत्र प्राप्ति हेतु दिया गया फल प्रसव पीड़ा से मुक्ति हेतु फल गाय को खिला दिया गया और बहन के बच्चे को अपना बच्चा बताया गया।फल के प्रभाव से गाय को भी मनुष्य के रूप में एक पुत्र पैदा हुआ जो गोकर्ण कहलाया और धुंधुली का पुत्र धुंधकारी कहलाया। गोकर्ण एक विद्वान और तपस्वी हुए और धुंधकारी तामसिक प्रवृत्ति का दुष्ट, अहंकारी और वेश्यागामी हुआ।

एक दिन वेश्याओं के द्वारा उसे आग में जला कर मार डाला गया और वह प्रेत योनि में प्रवेश कर गया।
एक दिन गोकर्ण अपने पुराने घर में शयन करने के लिए गए तो प्रेत के रूप में उनका भाई धुंधकारी उनसे अपनी पीड़ा व्यक्त किया,सुर्यदेव के मार्गदर्शन से गोकर्ण ने भाई की आत्मा शांति के लिए सप्ताह भर भागवत कथा का आयोजन किया।

सबसे महत्वपूर्ण जो सात पोर का बांस कथा में लगाया गया था उसी पर धुंधकारी भी बैठ कर कथा श्रवण करने लगा और प्रत्येक दिन एक पोर बांस फट जाता इस तरह सात दिन में सातों पोर फट गया और भगवान के पार्षद विमान के साथ कथा में पधारे धुंधकारी उसी पर सवार होकर गोलोक को प्रस्थान कर गए। श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करने से और कराने से सभी जीवों को मुक्ति मिलती है।


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