वाचरों को मानदेय न मिलने से छायी भुखमरी

एस प्रसाद (संवाददाता)

-मानदेय के अभाव में दीपावली त्यौहार बिता फीका
-डेढ़ वर्ष से अधिक समय का बकाया है मानदेय

म्योरपुर। स्थानीय वन रेंज के जंगल में कार्य कर रहे वाचरों का मानदेय न मिलने से परिवार के सामने भुखमरी की स्थिति खड़ी हो गयी है।उनके बच्चों की पढ़ाई भी बाधित होने लगी है।वाचर आशिम अली और नन्हेलाल की मानें तो वर्ष 2016 से सामाजिक वानिकी का पौध रोपड़ ,प्रहरी,गड्ढा खोदाई कार्य मे वन विभाग द्वारा कार्य लिया गया है अधिकारियों द्वारा कहा गया था कि मजदूरी खाते में भेज दिया जाएगा परन्तु आज तक उनकी पगार नही मिल सका है।बकाया पैसा एक वर्ष से अधिक समय का हो गया।अब परिवार भरण पोषण करने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।पैसे के अभाव में बच्चों का फीस अदा न होने से पढ़ाई भी बाधित होने लगी है।बकाया मजदूरी मिल जाता तो काफी सहूलियत हो जाती। वाचरों का इतने दिनों की मजदूरी न मिल पाने से उनमे रोष व्याप्त है।

उनका आरोप है कि बकाया मानदेय को लेकर अधिकारी उदासीन रवैया अपनाये हुए है कई बार अधिकारियो से बकाया मानदेय के भुगतान हेतु गुहार लगाई गयी परन्तु अभी तक उनके द्वारा कोई भी संतोषजनक जबाब नही दिया जा रहा है।वाचरों का कहना है कि दीपावली पर भी मानदेय नही मिला तो पैसे के अभाव में उनकी दीपावली भी फीकी साबित हुई।

वाचरों ने वनप्रभागीय अधिकारी रेनुकूट का ध्यान आकृष्ट कराते हुए जल्द से जल्द मानदेय भुगतान कराये जाने की मांग किया है।इस सन्दर्भ में वन दरोगा वीजेन्द्र कुमार ने बताया कि 2016 से पहले के बकाये मानदेय के बारे में जानकारी नही है।इधर जो कार्य कराये गए है उनका भुगतान फंड आते ही करा दिया जायेगा।


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