“जलाओ दिए पर रहे ध्यान इतना,अँधेरा धरा पर कहीं रह न जाए……”

धर्मेन्द्र गुप्ता (संवाददाता)

विंढमगंज। दिवाली, एक धार्मिक, विविध रंगों के प्रयोग से रंगोली सजाने, प्रकाश से सुसज्जित औऱ खुशी का बुराई रूपी अंधकार को हटाकर खुशियाँ मनाने का त्यौहार है। गोपालदास’ नीरज’ द्वारा रचित उक्त पंक्तियां दीवाली के रहस्य को सजोये हुए हम सभी के लिए प्रेरणाश्रोत है।यह त्यौहार पूरे भारत के साथ साथ देश के बाहर भी कई स्थानों पर मनाया जाता है।

यह पाँच दिवसीय त्यौहार है जो धनतेरस से शुरु होकर भैया दूज तक मनाई जाती है।

भारतीय त्यौहारों का बिशेष महत्व होता है जिसके माध्यम से हम स्वयं को अन्धकार से प्रकाश की ओर ले जाने की प्रेरणा मिलती है। घर के चारों ओर दिये और मोमबत्ती जलाकर पुरे घर को प्रकाशित किया जाता है। दिवाली का त्यौहार वर्ष का सबसे सुंदर और शांतिपूर्ण समय लाता है जो मनुष्य के जीवन को खुशियों से भर देता है।

क्यों मनाते है दीवाली-

हिन्दू मान्यता के अनुसार,

भगवान राम राक्षस राजा रावण को मारकर और उसके राज्य लंका को जीतकर अपनी पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण के साथ अयोध्या वापस आये थे। प्रभु श्री राम के अयोध्या वापस लौटने के दिन दिए जलाकर खुशियां मनाये जो आज दीवाली के रूप में परम्परा बन गयी।
इस दिन धन और समृद्धि की स्वामिनी देवी लक्ष्मी के पूजन का विशेष महत्व है।


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