अयोध्या विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सुरक्षित रखा अपना पक्ष,

अयोध्या मामले में सभी पक्षों की ओर से बुधवार को बहस पूरी होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया । सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या विवाद मामले में सुनवाई पूरी होने के बाद ‘मोल्डिंग ऑफ रिलीफ’ पर लिखित दलील को जमा करने के लिए तीन दिन का समय दिया ।

आज सुबह करीब 10:35 पर जब चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई वाली पांच जजों की बेंच बैठी, तो यह साफ कर दिया कि आज सुनवाई हर हाल में पूरी कर ली जाएगी । मामले में अलग से अर्जी दाखिल करने वाले कुछ पक्षकारों को जिरह के लिए वक्त देने से मना करते हुए चीफ जस्टिस ने कहा, “बहुत हो चुका । इस मामले पर अब और सुनवाई नहीं हो सकती. हम समझते हैं कि सभी पक्ष अपनी बातें कह चुके हैं । आज शाम जब हम दिन की कार्यवाही खत्म करके उठेंगे, तब मामले को भी की सुनवाई भी बंद कर दी जाएगी ।”

इसके बाद सभी पक्षकारों ने तेजी से अपनी बात रखनी शुरू कर दी। रामलला विराजमान पक्ष के सी एस वैद्यनाथन ने मुस्लिम पक्ष की बातों का जवाब देते हुए कहा, “पैगंबर मोहम्मद ने एक बार कहा था कि किसी को मस्जिद उसी जमीन पर बनानी चाहिए जिसका वह मालिक हो । मुस्लिम पक्ष अयोध्या की जमीन पर मालिकाना हक साबित नहीं कर पाया है । कुछ समय नमाज पढ़े जाने को आधार बनाकर जमीन का मालिक बनने की कोशिश कर रहा है ।

इसके बाद मामले में 1950 में याचिका दाखिल करने वाले पहले याचिकाकर्ता स्वर्गीय गोपाल सिंह विशारद के लिए रंजीत कुमार, महंत धर्मदास के लिए जयदीप गुप्ता जैसे वकीलों ने अपनी बातें रखीं । अखिल भारतीय हिंदू महासभा की तरफ से विकास सिंह जिरह के लिए खड़े हुए तो विवाद की स्थिति बन गई ।

मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने हिंदू पक्षों के हर दलील का जवाब दिया । उन्होंने कहा कि कभी मंदिर तोड़कर मस्जिद नहीं बनाई गई । उन्होंने कहा कि मंदिर के होने के कोई सबूत नहीं मिले हैं। 1886 में फैजाबाद कोर्ट भी कह चुका है कि विवादित जमीन पर मंदिर के कोई सबूत नहीं मिले।

राजीव धवन ने बाबरी मस्जिद के पक्ष में बाबर के उस दस्तावेज का भी हवाला दिया, जिसमें मस्जिद निर्माण के लिए लगान माफ किया गया था । मुगलों को आक्रमणकारी बताने पर धवन ने कहा कि चंगेज खां, तैमूर, अंग्रेजों के साथ-साथ आर्यों तक को जानना होगा ।

राजीव धवन ने हिंदू-मुस्लिम शासकों में फर्क करने पर भी आपत्ति जताई । इससे पहले आखिरी सुनवाई में हिंदू पक्षों ने अपनी दलील पेश की. ।रामलला विराजमान के वकील ने कहा कि मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाई गई, इसलिए पूरे परिसर पर उनका मालिकाना हक बनता है ।

अयोध्या विवाद मामले की अंतिम सुनवाई के दौरान बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम पक्ष की ओर से हिंदू पक्ष के एक दस्तावेज के टुकड़े-टुकड़े फाड़ दिए जाने की वजह से माहौल गरम रहा । यह 5 जजों की पीठ के सामने किया गया, जिसकी अध्यक्षता चीफ जस्टिस रंजन गोगोई कर रहे थे। इस पर जस्टिस गोगोई ने कड़ी प्रतिक्रिया दी ।

चीफ जस्टिस गोगोई ने देखा कि इस मामले में शामिल एक पक्ष ऐसा माहौल पैदा कर रहा है, जो सुनवाई के अनुकूल नहीं है । उन्होंने कहा, ‘हम सुनवाई को इस तरह से जारी नहीं रख सकते। लोग खड़े हो रहे हैं और बिना बारी के बोल रहे हैं । हम भी अभी खड़े हो सकते हैं और मामले की कार्यवाही को खत्म कर सकते हैं ।

चीफ जस्टिस गोगोई ने पाया कि यह सुनवाई के अनुकूल माहौल नहीं है, खास तौर से मुस्लिम पक्ष का व्यवहार । अदालत के भीतर मामलों की स्थिति पर अपनी पीड़ा जाहिर करते हुए चीफ जस्टिस ने कहा, ‘जहां तक हम समझते हैं, बहस खत्म हो गई है।


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