अरशद खान की राम लीला

राहुल शुक्ला (ब्यूरो)

शाहजहांपुर । जहां एक तरफ सांप्रदायिकता पर सांप्रदायिक माहौल को बिगाड़ने की कोशिश कर रही है तो वही रामलीला में रामायण के पात्रों का रोल निभा रहे अरशद खान हिंदू मुस्लिम एकता की अटूट मिसाल पेश कर रहे हैं। रामलीला के दूसरे कलाकार अरशद खान से बेहद लगाव रखते हैं । अरशद खान का कहना है कि सिर्फ आपसी भाईचारा ही हमारी संस्कृति को जिंदा रह सकता है ।

दरअसल अरशद खान ओसीएफ रामलीला में पिछले 22 सालों से भगवान परशुराम विश्वामित्र और विभीषण का रोल करते आ रहे हैं । इस बार भी उन्हें रामलीला के मंचन में अलग-अलग रोल मिले हैं। जिन्हें वह बखूबी निभाते हैं । अरशद खान को रामायण की ऐसी कई चौपाइयां याद है जिन्हें आम लोग याद नही कर पाते। अरशद का कहना है कि इस रामलीला में मंचन के जरिए उन्होंने भगवान राम के आदर्शों के बारे में सीखा है । अरशद का यह भी कहना है कि हम एक दूसरे के धर्मों के बारे में जानकारी होना चाहिए और रामलीला एक ऐसा मंच है जहां से वह हिंदू धर्म की अच्छाइयों को जान पाए हैं। उनका यह भी कहना है कि आज कुछ संप्रदायिकता करते हैं अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए धार्मिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन हमारा आपसी भाईचारा ऐसे लोगों को मुंहतोड़ जवाब दे सकता है।

अरशद खान यहां आकर सबसे पहले नमाज पढ़ते हैं। उसके बाद वह मां सरस्वती को नमन भी करते हैं । उनका मंचन ऐसा है जिसे देखकर दूसरे कलाकार दांतो तले उंगली दबा लेते हैं । भगवान राम का रोल कर रहे अंकित का कहना है कि अरशद की रामायण के पात्रों का मंचन देख कर वह सभी उनकी इस भावना का सम्मान करते हैं।

सांप्रदायिकता के नाम पर आज दो धर्म को बांटने की नाकाम कोशिश की जा रही है। ऐसे में अरशद खान की रामायण के पात्रों में रुचि हिंदू मुस्लिम एकता की अटूट मिसाल पेश कर रही है । क्योंकि भगवान राम के आदर्श दुनिया में हर किसी को प्रभावित करते हैं।


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