चोपन रामलीला : लक्ष्मण को लगा शक्ति बाण

घनश्याम पाण्डेय/विनीत शर्मा (संवाददाता)

चोपन। सब्जी मंडी में चल रही रामलीला में श्रीराम और उनकी वानर सेना लंका पहुंच चुकी है और रावण की सेना के साथ उनका युद्ध हो रहा है। एक-एक करके रावण के सभी योद्धा मारे जा रहे हैं। इधर, रावण का पुत्र मेघनाथ भी अपने पराक्रम से श्रीराम की वानर सेना को पराजित करता है। ऐसे में लक्ष्मण आगे बढकऱ मेघनाथ से युद्ध करने मैदान में आते हैं। लक्ष्मण पहली बार तो मेघनाथ को अपने बाण से मूर्छित कर देते हैं। दूसरी बार फिर मेघनाथ उठता है

और इस बार लक्ष्मण पर शक्तिबाण चलाता है। लक्ष्मण मूर्छित हो जाते हैं। अपने अनुज की यह दशा देखकर राम व्याकुल हो जाते हैं।
विभीषण बताते हैं कि लंका में सुखेन वैद्य हैं जो

इलाज कर सकते हैं। हनुमान जाते हैं और सुखेन को लेकर आते हैं। वो बताते हैं कि लक्ष्मण की मूर्छा सिर्फ संजीवनी बूटी से ही दूर हो सकती है। जो द्रोणाचल पर्वत पर ही मिलेगी। इस जड़ी का पौधा चमकदार होता है। हनुमान इसके लिए जाने को तैयार हो जाते हैं। राम उन्हें आज्ञा देते हैं।

रावण को यह सूचना मिल जाती है कि लक्ष्मण की मूर्छा जगाने के लिए हनुमान द्रोणाचल पर्वत की ओर जा रहे हैं। वह कालनेमी से हनुमान का मार्ग रोकने जाने को कहता है। कालनेमी साधु के वेष में आता है, लेकिन वह हनुमान का मार्ग रोकने में सफल नहीं हो पाता। हनुमान पर्वत पर पहुंचते हैं तो वहां बहुत से जड़ी बूटियां उन्हें चमकीली दिखती हैं। वे पूरा पर्वत उठाकर वापस होते हैं। रास्ते में भरत उन्हें देख लेते

हैं। वो समझते हैं कि राम का कोई दुश्मन हैं। वे बाण चलाकर हनुमान को नीचे उतरने कहते है। हनुमान बताते हैं कि वे मूर्छित हुए लक्ष्मण के लिए ही जड़ी बूटी ले जा रहे हैं। हनुमान वापस पहुंचते हैं और सुखेन संजीवनी बूटी से लक्ष्मण की मूर्छा तोड़ते हैं।


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