श्रीरामलीला-प्रभु श्रीराम के शरण गए तो जीते जी तर जाओगे,वर्ना अकाल मृत्यु होगी …………

धर्मेन्द्र गुप्ता (संवाददाता)

विंढमगंज । थाना क्षेत्र के राजा बरियार शाह खेल मैदान महुली में चल रहे श्रीरामलीला के ग्यारहवें दिन के रामलीला में विभीषण को प्रभु श्रीराम के शरण में आना,रावण अंगद संवाद आदि महत्वपूर्ण प्रसंगों का बड़े ही मार्मिक ढंग से मंचन किया गया।रामलीला के क्रम में रावण द्वारा अपने भ्राता विभीषण चरण प्रहार कर लंका से निकाल देने के बाद भी भिभिषण प्रभु श्रीराम के शरण में आते हैं।प्रभु श्रीराम सन्धि प्रस्ताव लेकर अंगद को रावण के पास भेजते हैं।जहाँ अंगद और रावण के रावण का संवाद होता है।कुछ बातें रावण को नागवार लगती हैं बध करने का आदेश देता है।परन्तु अंगद कहते हैं कि यदि तुमसे कोई बीर है तो मेरा पैर जमीं से खिसका दे।यह कहकर अंगद अपने पाँव जमीं पर जमा देते हैं।रावण दरवार के सभी बीर योद्धा अपनी ताकत आजमाते हैं परन्तु कोई भी अंगद के पाँव हिला तक नही सके।अंत में तक हार कर रावण स्वयं अंगद के पाँव उठाने के लिए आता है तो अंगद अपने पाँव हटा लेते हैं कहते हैं मेरा पाँव क्यों छूते हो।प्रभु के पाँव छुओ,वे तुम्हे अवश्य माफ़ कर देंगे।
“यदि प्रभु श्रीराम के शरण गए, तो जीते जी तर जाओगे।
वर्ना अकाल मृत्यु होगी, धुन-धुन कर पछताओगे”।
यह कहकर अंगद रावण दरवार में युद्ध का ऐलान कर लौट आते हैं।

इस अवसर पर कमेटी के अध्यक्ष कामता कनौजिया, पंकज गोश्वामी, वीरेंद्र कन्नौजिया, उत्कर्षमणि, प्रेमचंद, चंद्रभूषण कन्नौ सहितअन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।


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