समुद्र पर सेतु का निर्माण हो जाने से रावण हुआ भयभीत

मनोज वर्मा (संवाददाता)

रेनुकूट । श्री रामलीला परिषद हिंडालको के तत्वावधान में चल रहा रामलीला मंचन के दौरान शनिवार को रावण मंदोदरी में संवाद तथा रावण द्वारा विभीषण को अपमानित करके लंका से निकाल दिया तथा विभीषण का भगवान श्रीराम के शरण में जाना । वहीं पर रावण के नाना माल्यवंत ने रावण की समझाया कि कठिन समय मे भी किसी नजदीकी या घर के व्यक्ति को निकाल देने से वो आपका सब भेद खोल देगा पर रावण घमण्ड में चूर होकर उनकी बातों पर ध्यान नहीं दिया।

भक्तवत्सल श्री राम के केवल शरणागत मात्र से विभीषण को लंका का राजा घोषित कर दिया । इस मंचन के दौरान सर्व समर्थ राम ने समुद्र की मर्यादा बनी रहे इसलिए विभीषण के सुझाव से तीन दिनों तक कुशासन पर बैठकर रास्ता देने के लिए समुद्र की प्रार्थना की। लेकिन समुद्र ने अहंकार के कारण से रास्ता नहीं दिया । भगवान श्रीराम के द्वारा समुद्र को सुखाने देने के लिए अग्निवाण का संधान किया, समुद्र ने भयभीत होकर भगवान के शरणागत हो गया तथा नल व नील की सहायता से समुद्र पर सेतुनिर्माण का उपाय बताया। सेतुनिर्माण के पश्चात, भगवान श्रीराम ने समुद्र के किनारे रामेश्वर शिवलिंग का निग्रह किया । समुद्र सेतु का निर्माण हो जाने पर रावण ने अपने सभी पुत्रों को चारों दिशाओं में सुरक्षा के लिए लगा दिया वही राम ने भी रावण के सुरक्षा घेरे को तोड़ने के लिए अपने सभी बानरी सेना को लगा दिया और रावण को एक बार भी समझाने के लिए अंगद को लंका की ओर भेज दिया ।

इस पहले रामलीला परिषद के अध्यक्ष बी एन झा ने मुख्य अतिथि प्रोजेक्ट डिपार्टमेंट के ए पी सिंह, परचेज विभाग के अनुराग चौधरी व फ्रैविकेशन प्लांट के राना भट्टाचार्य का स्वागत व अंगवस्त्र देकर सम्मान किया रामलीला का शभारम्भ गणेश पूजा करके रामलीला का मंच का शुभारंभ कराया ।


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