श्री राम लीला मंचन महुली – कैकेई के कटु बचन सुनते ही मुर्क्षित हुए राजा दशरथ

धर्मेन्द्र गुप्ता(संवाददाता)

विंढमगंज। थाना क्षेत्र के स्थानीय राजा बरियार शाह खेल मैदान महुली पर चल रहे श्रीरामलीला के छठवें दिन राम बनवास लीला का बड़े ही मार्मिक ढंग से मंचन किया गया।रामलीला परिषद के कलाकारों ने बिभिन्न चरित्रों के रूप में अपने भूमिका का लोहा मनवा दिया।रामलीला के क्रम में अयोध्या में उत्सव का माहौल देख दासी मन्थरा को पता चलता है कि श्रीराम का राज्याभिषेक होने वाला है तो वह तुरन्त महारानी कैकेई के पास पहुँच कर महाराज दशरथ द्वारा दिए दो बचन का याद दिलाती है कि यह उचित समय है,महाराज के दिए बचन को मांगने का यही उचित अवसर है।श्रीराम का आज राज्याभिषेक होने वाला है।

आपका पुत्र भरत राजा नही बन सकता।इसलिए भड़काते हुए कहती है कि दो बचनों में पहली भरत को राजगद्दी तथा दूसरी राम को चौदह वर्ष की बनवास का बर मांगना।यह सुनकर रानी कैकेई को क्रोध आता है परन्तु लालच भरी बातों को सुनकर महारानी कैकेई तैयार हो जाती हैं तथा अपने बचनों को मांगने हेतु रूठकर कोप भवन में चली जाती है।महाराज को इसकी खबर लगते ही महारानी कैकेई को मनाने कोपभवन में जाते हैं।वहाँ महारानी द्वारा कटु बचन सुन महाराजा मूर्छित हो जाते है।कहते हैं कि
“रघुकुल रीति सदा चलि आई,प्राण जाय पर बचन न जाई”
उधर पिता की आज्ञा पर प्रभु श्रीराम माता सीता के साथ वन को गमन करते हैं।इसके अलावा वन गमन के समय अयोध्या वासियों का बिरह,केवट सम्वाद जैसे अनेक दृश्यों ने दर्शकों का मन मोह लिया।इस मौके पर समिति के अध्यक्ष कामता कन्नौजिया,वीरेंद्र कन्नौजिया,पंकज गोश्वामी,चन्द्र भूषण कन्नौजिया,प्रेम चन्द सहित समिति के अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।


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