शिवधनुष भंग होते ही श्रीरामजी की हुई जानकी

रमेश यादव(संवाददाता)

दुद्धी । श्रीरामलीला कमेटी दुद्धी के तत्वाधान में आयोजित मंगलवार को रामलीला मंचन में दुद्धी की सुप्रसिद्ध धनुषयज्ञ की लीला का मंचन किया गया। आज इस लीला में दर्शकों की अपार भीड़ हुई। महाराज जनक के प्रण को सुनकर देश देश के राजा सीता स्वयंवर में उपस्थित हुए। उस स्वयंवर में देश देश के राजा राजकुमार सहित रावण और बाणासुर जैसे बलवान भी उपस्थित हुए। पर उस धनुष को कोई भी उठा ना सका। इस संताप से जनक का हृदय जलने लगा और विधाता को दोष देने लगे।
कुंवरि मनोहर विजय बडि कीरति अति कमनीय। पावन हारि विरंचि जनि रचेऊ न धन दमनीय।
राजा जनक ने कहा सीता जी को ब्रह्मा ने उत्पन्न किया पर क्या सीता के योग्य ब्रह्मा ने वर नहीं बनाया ।क्या पृथ्वी वीरों से खाली हो गई है।
श्रीरामचरितमानस में गोस्वामी तुलसीदास ने लिखा है…..
बिस्वामित्र समय सुभजानी।बोले अति सनेहमय बानी।
उठहु राम भंजहु भवचापा। मेटहु तात जनक परितापा॥
लेत चढ़ावत खैचत गाढे़। काहु न लखा देख सब ठाढे़ । तेहि सन राम मध्यधनु तोरा।भरे भुवन धुनिघोर कठोरा।

रामजी को धनुष लेते,चढ़ाते,और जोर से खींचते किसी ने नहीं देखा। अर्थात ए तीनों काम इतनी फुर्ती हे हुए कि धनुष को कब उठाया, कब चढ़ाया, और कब खींचा। किसी को पता नहीं लगा श्री राम जी को धनुष खींचे खड़े देखा उसी क्षण श्री राम जी ने धनुष को तोड़ डाला। भयंकर कठोर ध्वनि से सब लोक भर गए और जनकपुर में खुशी छा गई।
शिव धनुष भंग होने के बाद बहुत ही मार्मिक व रोचकता पूर्वक परशुराम व लक्ष्मण संवाद की लीला का मंचन किया गया। आज रामलीला में दर्शकों की अपार भीड़ देखने को मिली।

इस अवसर पर तहसीलदार दुद्धी, अधिवक्ता गण, चिकित्सक गण, दुर्गा पूजा समिति, जय बजरंग अखाड़ा समिति के साथ रामलीला कमेटी के अध्यक्ष रविन्द्र जायसवाल, महामंत्री आलोक अग्रहरि, संरक्षक दिनेश आढती व अन्य पदाधिकारी व सदस्यों के साथ तमाम श्रद्धालु दर्शक उपस्थित रहे।


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