जीवित्पुत्रिका व्रत रख माताओं ने अपने बच्चों की दरगाह की कामना की

घनश्याम पाण्डेय/विनीत शर्मा(संवाददाता)

– हिंदू संस्कृति में कठिन व्रतों में से एक है जीवित्पुत्रिका व्रत

चोपन।पुत्र के दीर्घायु, सुख तथा समृद्धि की कामना लेकर आज रविवार को नगर सहित आसपास की महिलाओं ने जीवित्पुत्रिका का निर्जला व्रत रखती हैं। हिंदू संस्कृति में इस व्रत का अत्यंत महत्व है इस व्रत को रखने वाली महिला अपने पुत्र के दीर्घायु वह सुख समृद्धि के लिए ईश्वर से याचना करती है इस मौके पर सोन नदी स्नान तथा पूजा-पाठ के बाद जिऊतिया की कथा का श्रवण किया। महिलाओं ने प्रतीक के रूप में सोने या चांदी की जिउतिया गले में धारण किया। ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को रखने से पुत्र पर आने वाला संकट भी टल जाता है।
इस पर्व के मद्देनजर महिलाओं ने शनिवार की भोर से ही निर्जला व्रत किया। दोपहर बाद महिलाएं सोन नदी स्नान करने के उपरांत हाईडिल कालोनी, शितला घाट, विभिन्न घाटों पर पहुंची। स्नान के बाद पूजा-पाठ तथा दान-पुण्य किया। इसके बाद सोन नदी घाटों, घरों तथा मंदिरों में ब्राह्मण से जिउतिया की कथा सुनी। इसके बाद पूजा की थाली या पात्र में रखे सोने या चांदी के जिउतिया को महिलाओं ने धारण किया। जिस महिला के जितने पुत्र होते हैं, वह उतनी संख्या में जिउतिया को धारण करती हैं।


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