पुरुषों से ज्यादा महिलाओं के लिए मोटापा बन सकता हैं, खतरनाक,जानें वजह

छुपी हुई चर्बी से महिलाओं में टाइप-2 मधुमेह और दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। एक हालिया शोध में यह दावा किया गया है। वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया कि 3,25,000 से अधिक लोगों की आंत में वसा मौजूद होती है, जो पेट के पास मौजूद अंगों को घेरती है। शरीर के अंदर अंगों के पास मौजूद इस वसा के कारण खासकर महिलाओं में टाइप-2 मधुमेह, उच्च रक्तचाप और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है।

पुरुषों को कम खतरा:
शोध के अनुसार, महिलाओं द्वारा अंगों पर अतिरिक्त एक किलोग्राम चर्बी जमा करने से उनमें स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का खतरा सात गुना तक बढ़ जाता है। वहीं, पुरुषों में यह खतरा दोगुना होता है। हालांकि, महिलाओं और पुरुषों के बीच में मौजूद इस अंतर के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिली है। प्रमुख शोधकर्ता असा जोहानसन ने कहा, हम आश्चर्यचकित थे कि आंतों में मौजूद वसा से पुरुषों की तुलना में महिलाओं को खतरा ज्यादा था। एक अतिरिक्त किलो से महिलाओं में मधुमेह का खतरा सात गुना बढ़ गया।

अमेरिका और यूके में यह दिल संबंधी बीमारियों से एक चौथाई मौतों की वजह है। टाइप-2 डायबिटीज भी एक गंभीर समस्या है और दुनियाभर में 50 करोड़ लोग इस समस्या से जूझ रहे हैं।

हार्मोन की कार्यप्रणाली को करता है बाधित:
आंतों में जमी वसा को लंबे समय से मधुमेह और दिल की बीमारियों का अहम कारण माना जाता रहा है। इस शोध में पता चला है कि यह एक सक्रिय वसा होती है और शरीर में हार्मोन की कार्यप्रणाली को प्रभावित करने में भी इसकी खतरनाक भूमिका होती है।

आंतों की वसा रेटिनोल बाइंडिंग प्रोटीन फोर नामक एक प्रोटीन बनाती है, जो इंसुलिन के प्रति प्रतिरोध को बढ़ावा देता है। ऐसा तब होता है जब कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति सही प्रतिक्रिया नहीं देतीं और इससे मधुमेह होने का खतरा बढ़ जाता है। हालांकि, इस शोध में आंत की वसा के घातक स्तर के बारे में पूरी तरह से पता नहीं लगाया जा सका है और उसके पीछे मौजूद जीन के बारे में भी कुछ स्पष्ट नहीं हो पाया है।

अधिक जानने के लिए, शोधकर्ताओं ने हजारों लोगों के छिपे हुए वसा के स्तर का अनुमान लगाया। उन्होंने ऐसा जीन की अभिव्यक्ति को देखकर किया, जो हृदय रोग और टाइप 2 मधुमेह का कारण बनता है।

पत्रिका जर्नल नेचर मेडिसिन में प्रकाशित शोध में पता चला है कि जिन महिलाओं की आंत में वसा उच्च स्तर पर पाई गई उनमें उच्च रक्तचाप, दिल का दौरा या सीने में दर्द, टाइप 2 मधुमेह और उच्च रक्त वसा के स्तर का खतरा अधिक था। चौंकाने वाली बात यह थी कि जिन महिलाओं में आंत की वसा मध्यम स्तर पर थी उनमें उच्च स्तर वालों की तुलना में ज्यादा खतरा था।

जीन भी हैं जिम्मेदार:
प्रयोग के एक दूसरे भाग में, वैज्ञानिकों ने आंत में वसा के विकास को प्रभावित करने वाले जीन की पहचान करने के लिए मानव जीनोम की जांच की। उन्होंने पाया कि 200 से अधिक जीन इस प्रक्रिया में शामिल हैं। शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि बड़ी संख्या में जीन आंत में वसा को बढ़ाने के लिए जिम्मेदार होते हैं। यह जीन लोगों को ज्यादा खाने और आसलपूर्ण जीवन जीने के लिए मजबूर करते हैं। उन्हें उम्मीद है कि मरीजों की जीन को देखकर डॉक्टर एक दिन यह बताने में सक्षम हो जाएंगे कि उसे मधुमेह और दिल की बीमारियों का खतरा है या नहीं। वर्तमान में आंत की वसा की एमआरआई और सीटी स्कैन की मदद से पहचान की जाती है। यह दोनों ही प्रक्रियाएं काफी महंगी और समय लेने वाली होती हैं।


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