लेफ्टिनेंट कर्नल गौरव सोलंकी का 6 दिन बाद बरामद हुआ शव

14 सितम्बर 2019

12 सितंबर को डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशन में तैनात भारतीय सेना के लेफ्टिनेंट कर्नल गौरव सोलंकी का शव बरामद हुआ था । दो साथियों को बचाने के दौरान उनकी जान चली गई थी । बता दें, उनका शव 6 दिन बाद मिला था ।

आपको बता दें, दिल्ली निवासी लेफ्टिनेंट कर्नल गौरव सोलंकी जो मध्य अफ्रीकी देश डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशन में मिलिट्री स्टॉफ ऑफिसर के रूप में तैनात थे, 8 सितंबर को गोमा के पास चेगेरा द्वीप के पास कीवु लेक में कयाकिंग करने गए थे । कुछ देर बाद साथ गए सभी लोग वापस अपने कैंप लौट आए, लेकिन गौरव सोलंकी वापस नहीं आए ।

भारतीय सेना से जुड़े सूत्रों के अनुसार, लेफ्टिनेंट कर्नल गौरव सोलंकी शनिवार दोपहर से लापता थे, और उनके लापता होने के बाद तलाशी अभियान शुरू कर दिया गया था ।

लेफ्टिनेंट कर्नल गौरव सोलंकी के लिए सर्च अभियान जोरदार तरीके से चलने लगा । बाद में उनका शव कीवु झील के अंदर मिला, जो चेगेरा द्वीप से करीब एक किलोमीटर अंदर था । आपको बता दें, कॉंगो में रवांडा के साथ लगती सीमा पर एक झील है जिसका नाम है ‘कीवू’ है जो विश्व की 10 सबसे गहरी झीलों में से एक है. बताया जाता है कि इस झील की गहरायी लगभग 400 मीटर तक है और इस झील के तल से मीथेन गैस निकलती रहती है ।

यह झील बहुत बड़ी है और इसका क्षेत्रफल कई किलोमीटर तक फैला हुआ है और इसके अंदर ही कई छोटे-छोटे द्वीप भी हैं. जहां कयाकिंग व रोयिंग की जाती है ।

इन दोनों छोटे द्वीपों में से एक द्वीप पर एक कैफे भी है जहां पर आमतौर पर यूएन मिशन के तहत गई हुई विभिन्न देशों की शांति सेना के सैनिक और अफसर ही जाते हैं. पर्यटक तो इस देश में शायद ही कोई जाता हो। पर्यटकों का न जाने का एक मुख्य कारण है, कॉंगो में फैली अराजकता और हिंसा ।

लूटपाट और हिंसा का आलम यह है कि जगह-जगह लाशें पड़ी रहती हैं, जिन्हें कोई उठाता तक नहीं है । यह हालत किसी दूर-दराज क्षेत्र की नहीं है, बल्कि शहरों तक यही हालत है ।

कीवू झील में कुछ अफसर कयाकिंग कर रहे थे । क्याक दो थी और दोनों पर दो-दो अफसर थे कि अचानक एक क्याक पानी में पलट गई जिससे उस पर सवार दोनों अफसर डूबने लगे । इन्हें डूबता देख गौरव सोलंकी ने बचाने के लिए झील में छलांग लगा दी।

लेफ़्टिनेंट कर्नल गौरव सोलंकी ने दोनों अफसरों को बचा लिया लेकिन परमात्मा को कुछ और ही मंजूर था कि वह खुद को नहीं बचा सके और पानी में डूब गए ।

बताया जा रहा है कि अपने दोनों साथियों को बचाने के दौरान वह थकान के कारण खुद पर नियंत्रण नहीं रख सके और गहरे पानी में डूब गए ।

लेफ़्टिनेंट कर्नल गौरव सोलंकी ने आगामी 16 सितंबर को भारत वापस आना था । वो वापस आकर अगले कुछ दिनों में भारत में अपने रेजिमेंट में शामिल होने वाले थे ।


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