कोटा ग्राम पंचायत में विकास कार्यों की जांच करने पहुंचे अधिकारी, खुल गयी विकास की पोल

07 सितंबर 2019

शशि चौबे/संजय केसरी (संवाददाता)

० कोटा ग्राम पंचायत में जांच अधिकारी ढूंढते नजर आए विकास की किरण

० आखिर किसके इशारे पर चल रही कोटा में मनमानी

० पहले क्यों नहीं हुई जांच व कार्यवाही

० उच्च स्तरीय जांच कमेटी से हुई जांच तो करोड़ों का भ्रष्टाचार का सकता है सामने

० योगी सरकार अधिकारी – कर्मचारी की करतूत जांच में उजागर

० कोटा ग्राम पंचायत के 12 सदस्य एफिडेविट देकर जांच की कर चुके हैं मांग

० पहले भी चर्चा में रहा है कोटा ग्राम पंचायत व प्रधानी

० ग्राम पंचायत में कार्यों को कराने के लिए तगाड़ी से ढोया जा रहा बालू

डाला । योगी सरकार भले ही विकास की धार को तेज करने में जुटी हो मगर अधिकारी व कर्मचारी कैसे सरकार के मंसूबों पर पानी फेर रहा है इसका नजारा उस समय देखने को मिला जब विकास कार्यों की जांच करने पहुंची टीम को मौके पर कुछ भी नहीं मिला । मामला चोपन विकासखंड के कोटा ग्राम पंचायत का है । जहां शिकायत एवं मीडिया की खबरों को संज्ञान में लेकर जांच टीम जब कोटा ग्राम पंचायत के कई टोलों में गई तो वहां के विकास कार्यों की हकीकत को जानकर वह भी दंग रह गई । ज्यादातर स्थानों पर काम दिखा ही नहीं और जहां थोड़ा बहुत दिखा तो वहां निर्माण कार्य घटिया था ।

आपको बता दें कि कोटा ग्राम पंचायत के 12 सदस्यों ने अपना इस्तीफ़ा देते हुए प्रधान पर आरोप लगाया था कि प्रधान व सेक्रेटरी द्वारा विकास के नाम पर धन का निकासी तो कर लिया गया मगर जमीन पर काम नहीं किया । सदस्यों द्वारा शिकायती पत्र के साथ शपथ पत्र भी लगाया गया था । पूर्व में मामले को अधिकारी बिल्कुल तरजीह नहीं दी लेकिन नए जिलाधिकारी ने इसे गंभीरता से लिया और जांच कर रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया । जिसके क्रम में आज डीसी मनरेगा, पीडी, बीडीओ चोपन व जेई मौके पर जाकर देखा तो सारे विकास कार्यों के दावे की पोल खुल गयी।
अधिकारी जगह-जगह जाकर विकास कार्यों को ढूंढते नजर आए मगर उन्हें कुछ भी नहीं मिला । इस बीच जांच टीम के अधिकारी मीडिया से बचते नजर आए । दबी जुबान से अधिकारियों का कहना था कि हालत बेहद खराब है ।

आपको बतादें कि चोपन विकास खंड के इतने बड़े ग्राम पंचायत में जहां विकास कार्य के लिए करोड़ों रुपये का फंड आता है लेकिन अधिकारियों की मिलीभगत या अनदेखी के कारण बंदरबांट हो जाता है ।

सवाल यह उठता है कि आखिर जो कार्य आज ढूढते नहीं मिल रहे उसकी जांच या मॉनेटरिंग पहले क्यों नहीं हुई । यदि गांव में प्रधान व सेक्रेटरी की मनमानी चल रही है तो आखिर पहले क्यों नहीं सामने आया या कितने मामलों में कार्यवाही या स्पष्टीकरण मांगा गया । कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि यह मामला सिर्फ एक ग्राम पंचायत तक सीमित नहीं है । यदि चोपन विकास खण्ड के अन्य ग्राम पंचायतों की जांच की जाय तो वहां भी विकास कार्य कागजों पर ही मिलेगा ।

अबाड़ी में ये होने थे कार्य, यह मिला स्थिति

1. पूर्व कन्या माध्यमिक विद्यालय गुरमुरा में सीसी रोड व बाउंड्री
जहां सीसी रोड का नदारद बाउंड्री में केवल नींव पड़ा हैं ।

2. गुरमुरा रोड से भगवान सिंह के घर तक सीसी रोड
रोड नदारद, आनन-फानन में ईटा बालू व सीमेंट तीन दिन पहले गिरा मिला

3. पटीहवा टोला में प्रेम के घर के पास रिबोर, पैसा निकल गया लेकिन जहाँ रिबोर नही हुआ

4. अबाड़ी रोड से केशव के घर तक सीसी रोड, यह भी मौके से नदारद मिला

5. अबाड़ी रोड से अमरजीत के घर तक, रोड नदारद

6.अबाड़ी रोड से उदयराज के घर तक, यहां घर रोड की पटरी से 10 मीटर की दूरी पर, फिर भी रोड नदारद, यहां भी आनन- फानन में सोलिंग व गिट्टी गिरा मिला

7. अबाड़ी रोड से भगवती के घर तक सीसी रोड पर आनन-फानन में कार्य शुरू किया गया

8. केशव के घर से महेंद्र के घर तक सीसी रोड, यहां भी रोड नदारद

9. अबाड़ी रोड से लाल बहादुर के घर तक इंटरलॉकिंग, कार्य नदारद

10. अबाड़ी रोड से बिहारी के घर से होते हुए हरिशंकर के घर तक सीसी रोड, कार्य नदारद

बहरहाल जांच टीम मौके पर जांच करके लौट चुकी है। अब देखने वाली बात यह है कि अक्सर विवादों में और चर्चाओं में रहने वाला कोटा ग्राम पंचायत पर अधिकारियों की क्या रिपोर्ट आती है और कार्यवाही की जद में कौन कौन आता है ।

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