रात 1 बजकर 55 मिनट पर चांद की धरती पर उतरेगा चंद्रयान 2, पीएम मोदी बेंगलुरु स्थित इसरो केंद्र में रहेंगे मौजूद

06 सितंबर 2019

चांद की धरती पर हिंदुस्तान इतिहास रचने वाला है । 7 सितंबर की रात 1 बजकर 55 मिनट पर चांद की धरती पर भारत का स्पेसक्राफ्ट चंद्रयान-2 उतरने वाला है । भारत पहला देश है जो चांद के दक्षिणी ध्रुव पर यान उतारेगा । इस प्रोजेक्ट की कमान भारत की दो महिला प्रोजेक्ट डायरेक्टर के हाथों में है।

चंद्रयान 2 जब चांद पर उतरेगा तो हर कोई सांसे थाम कर उस लम्हे को देखेगा, क्योंकि चांद के जिस हिस्से पर लैंडिंग होनी है वहां ऐसा करना इतना आसान भी नहीं है । चंद्रमा की सतह पर चंद्रयान-2 के उतरने का सीधा नजारा देखने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 60 हाईस्कूल विद्यार्थियों के साथ बेंगलुरु स्थित इसरो केंद्र में मौजूद रहेंगे । इसरो के चेयरमैन के सिवन ने बताया कि अब तक चांद पर भेजे गए मिशन में सॉफ्ट लैंडिंग के चांस केवल 37 फ़ीसदी ही सफल हुए हैं । हालांकि, बावजूद इसके इसरो पूरी तरह से आत्मविश्वास से भरा है कि यह मिशन सफल होगा । दरअसल वैज्ञानिक एक्सपेरिमेंट में हमेशा यह एक रूल रहा है कि अगर किसी एक्सपेरिमेंट के पास होने के एक फ़ीसदी भी चांस हो तो उसे जरूर आजमाया जाता है।

दरअसल लैंडिंग की संभावित सतह पर ढेरों गड्ढें, पत्थर और धूल है । लैंडिंग के वक्त प्रोपल्शन सिस्टम ऑन होने से धूल उड़ेगी।डर से सोलर पैनल पर धूल जमा हुई तो पावर सप्लाई पर असर पड़ेगा । धूल से ऑनबोर्ड कंप्यूटर सेंसर्स पर असर पड़ सकता है। लैंडिंग के वक्त मौसम भी बड़ी मुसीबत बन सकता है। चांद के दूसरे हिस्सों के मुकाबले यहां ज्यादा अंधेरा रहता है । इसलिए भी कोई देश यहां अपना मिशन नहीं भेजता ।

विक्रम लैंडर :

विक्रम लैंडर को चंद्रमा की सतह पर भारत की पहली सफल लैंडिंग के लिए डिज़ाइन किया गया है. इसी के अंदर रोवर मौजूद है ।

प्रज्ञान रोवर :

रोवर ए आई-संचालित 6-पहिया वाहन है, इसका नाम ”प्रज्ञान” है, जो संस्कृत के ज्ञान शब्द से लिया गया है. यही रोवर चांद की सतह पर उतरेगा और काम करेगा. इसका मकसद वहां से जानकारी जुटाना होगा, जिसे वह वैज्ञानिकों को भेजेगा ।

ISRO की वेबसाइट के अनुसार, प्रज्ञान रोवर चंद्रमा पर उतरने की जगह से पांच सौ मीटर की दूरी तक चल सकता है ।

इस मिशन की कुछ तकनीकी चुनौतियां हैं :

1. चंद्रमा की सतह पर उतरते समय बेहद कम स्वजचालित गति सुनिश्चित करने के लिए थौटलेवल इंजनों वाला प्रोपल्श न सिस्टवम ।

2. मिशन मैनेजमेंट- विभिन्नश चरणों पर प्रोपलैंट मैनेजमेंट, इंजन जलाना, कक्षा (ऑर्बिट) और प्रक्षेप पथ (ट्रैवेलरी) का डिजाइन

3. लैंडर विकास- दिशा सूचक (‍नेविगेशन), निर्देशन और नियंत्रण, दिशा बताने और बाधा से बचने के लिए नेविगेशन सेंसर और आराम से उतरने के लिए लैंडर लौग मैकेनिज्मन

4. रोवर विकास- लैंडर मैकेनिज्मर से रोल डाउन, चंद्रमा की सतह पर रोविंग मैकेनिज्मो, पावर प्रणालियों का विकास और परीक्षण, थर्मल (तापीय) प्रणालियां, संचार और मोबिलिटी प्रणालियां

चंद्रयान-1 और चंद्रयान-2 में कितना अंतर?

चंद्रयान 2 चांद की सतह पर अपना ‘विक्रम’ मॉड्यूल उतारने की कोशिश करेगा और 6 पहियों वाले रोवर ‘प्रज्ञान’ को चांद पर फिट कर देगा और इसके जरिए कई वैज्ञानिक परीक्षण किए जाएंगे ।

जबकि चंद्रयान-1 ये काम नहीं कर पाया था ।चंद्रयान-1 का लिफ्ट ऑफ भार 1380 KG था जबकि चंद्रयान-2 का भार 3850 किलोग्राम है।


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