प्रधान मंत्री मोदी ने की रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात

04 सितम्बर 2019

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रूस के दौरे पर हैं। बुधवार को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ उनकी मुलाकात में दोनों देशों के मजबूत रिश्तों की झलक देखने को मिली। इस दौरान कई समझौते भी हुए और सबसे महत्वपूर्ण असैन्य परमाणु ऊर्जा उत्पादन को लेकर सहमति बनती दिखी। दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने पोर्ट सिटी व्लादिवोस्तोक में अपनी द्विपक्षीय बैठक के दौरान भारत में परमाणु ईंधन के संयुक्त उत्पादन की संभावनाओं पर चर्चा की। यह डील होने पर असैन्य परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में ‘मेक इन इंडिया’ को भी बढ़ावा मिलेगा।

भारतीय सरजमीं पर परमाणु ईंधन के उत्पादन को लेकर टॉप लेवल की प्रतिनिधिमंडल वार्ता ऐसे समय में हुई है जब कुछ हफ्ते पहले ही रूस की सरकारी परमाणु ऊर्जा कंपनी रोस्तम की सहयोगी TVEL (परमाणु ईंधन का उत्पादन करने वाली) के वॉइस-प्रेजिडेंट ओलेग ग्रिगॉर्येव ने कहा था कि उनकी कंपनी भारत में न्यूक्लियर फ्यूल रॉड्स को असेंबल करने की दिशा में सोच रही है।
ग्रिगॉर्येव ने कहा, ‘हम समझते हैं कि भारत की प्रबल इच्छा चीजों के स्थानीय उत्पादन (मेक इन इंडिया) पर है। हम ऐसे सहयोग के लिए तैयार हैं और स्थानीय स्तर पर काम कर सकते हैं।’ उन्होंने कहा था कि रूस द्वारा दी गई फ्यूल पैलेट्स के इस्तेमाल से फ्यूल रॉड्स भारत मे असेंबल की जा सकती हैं लेकिन ज्यादा कुछ यूनिटों की संख्या पर निर्भर करता है।

बुधवार को असैन्य परमाणु ऊर्जा पर एक MoU पर हस्ताक्षर होने के बाद पुतिन ने कहा, ‘हम फ्लैगशिप जॉइंट प्रॉजेक्ट के तौर पर रोस्तम का भारतीय पार्टनरों के साथ सहयोग पर विचार कर रहे हैं। इसमें एक आधुनिक कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र का निर्माण भी शामिल है।’ उन्होंने आगे कहा कि इसके (कुडनकुलम) पहले दो यूनिट काम कर रहे हैं और तीसरा व चौथा पावर यूनिट तैयार हो रहा है। आपको बता दें कि मौजूदा समझौतों के तहत 20 वर्षों में कम से कम 12 रूसी डिजाइन वाली पावर यूनिटें बनाई जाएंगी।
रोस्तम में एक सूत्र ने बताया, ‘कुडनकुलम यूनिट-3 और यूनिट-4 के लिए न्यूक्लियर कॉम्पोनेंट शिपमेंट जारी है जबकि यूनिट 5 और 6 के मैटेरियल की शिपमेंट अगले साल से शुरू हो सकती है।’ कुडनकुलम को 6 रूसी VVER-1000 रिऐक्टर्स मिलेंगे जिसमें हर एक की क्षमता 1,000 MW की होगी। यूनिट-1 अक्टूबर 2013 में दक्षिण पावर ग्रिड से कनेक्ट हुआ और यूनिट-2 अगस्त 2016 में ग्रिड से लिंक हुआ।

यूनिट 1 और 2 की 2×1000 MW VVER रिऐक्टर्स ने संयुक्त रूप से 27,033 मिलियन यूनिट बिजली का अबतक उत्पादन किया है।


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