स्थानीय फैक्ट्रियों में जिले के मूल निवासियों को मिले रोजगार, डीसीएफ अध्यक्ष ने लिखा पत्र

सोमवार ,2 सितम्बर 2019

रमेश यादव (संवाददाता)

दुद्धी ।जिले के दुद्धी तहसील में स्थित कल कारखानों में यहाँ के मूल निवासियों को रोजगार न मिलकर गैर जनपद वासियो को रोजगार मिला हुआ है जिससे यहाँ के मूल मिवासी युवा ,बेरोजगार , कुशल,अकुशल,प्रशिक्षित और शिक्षित लोग दूसरे राज्यों पंजाब, हरियाणा, गुजरात, चेन्नई,अहमदाबाद में रोजी रोटी की जुगाड़ में चले जाते है ,और अधिकतर गाँवो के युवाओं की यहाँ लाशें (डेड बॉडी)आती हैं।उक्त बातें भाजपा के पूर्व जिला महामंत्री एवं डी सी एफ अध्यक्ष सुरेन्द्र अग्रहरि ने कही ।उन्होंने कहा कि दुद्धी, म्योरपुर, बभनी,चोपन, रॉबर्ट्सगंज, घोरावल, रामगढ़ ,नगवा ब्लॉक के कई गाँवो के अधिकतर आदिवासी युवा बेरोजगार लोग अपने यहाँ कई कल कारखाने होने के बावजूद दूसरे राज्यों में काम करने के लिए जाते है ।यह इस जिले के लिए अभिशाप से कम नहीं है कि जिस जनपद में लगभग 20 से ऊपर कल कारखाने हो और यहाँ के युवा बेरोजगार दूसरे राज्यों में काम करने के लिए रोजी रोटी की जुगाङ में जाए और बदले में उन परिवारों को सिर्फ और सिर्फ डेड बॉडी मिलती है , एक बात पर गौर किया जाए या सर्वे कराया जाए तो पता चलेगा कि लगभग 5 वर्ष के दौरान अब तक सोनभद्र जिले के 8 ब्लॉकों के बेरोजगार युवाओं की 1000 लाशें(डेड बॉडी) घर पहुँची होंगी।यह तो यहाँ के मूल निवासियों के साथ धोखा और उनके मूल अधिकारों का हनन है।यहाँ के कल कारखानों में यहाँ के लोगो की यानि मूल निवासियों की भागीदारी एक प्रतिशत से भी कम होगी।

बता दें कि दुद्धी तहसील में भारत की अग्रणी बिजली उत्पादन कंपनी एन. टी.पी.सी. शक्तिनगर, एन. टी.पी.सी.बीजपुर , रेनुसागर ,पिपरी हाइड्रो, एन. सी.एल. ,हिंडाल्को अल्युमिनियम इंडस्ट्रीज, अदित्य बिडला केमिकल्स , लैंको अनपरा पावर प्लान्ट, हाईटेक कॉर्बन ,बीजीआर जैसी कई आउटसोर्सिंग कंपनियों के साथ साथ रॉबर्ट्सगंज तहसील के अंतर्गत ओबरा में थर्मल पावर प्लांट, चुर्क व डाला में सीमेंट फैक्टरी, डाला व ओबरा में कई क्रसर प्लान्ट के साथ साथ अन्य भी प्लान्ट है जहाँ पर यहाँ के मूल निवासी आदिवासी बेरोजगार युवाओं के साथ साथ अन्य लोगो को भी रोजगार मिलना चाहिए लेकिन ऐसा हुआ नही और न हो रहा है क्योंकि इन कल कारखानों में काम करने वाले दूसरे जिले या राज्यों के होते है जो अपने जिले या राज्यों के लोगो को अपने धाक और शोर्स पर नौकरी दिला देते हैं और अपनी राजनीति करते रहते है ।इस जिले के लोगो को इन कारखानों में इसलिए नही रखा जाता हैं जैसा कि कल कारखानों के उच्च अधिकारियों की दलील होती हैं कि स्थानीय लोग राजनीति ज्यादा करते है ।ऐसे अधिकारियों के बारे मे यही कहना है कि ऐसी दलीले देने से पहले यहाँ के मूल निवासियों के मूल अधिकारों के बारे मे सोचे । कोई भी कल कारखाने जो भी स्थापित हुए उसमे शर्त साफ साफ था कि जो जिस योग्यता को रखेगा उसके हिसाब से नौकरी दी जाएगी लेकिन हुआ सब उसके विपरीत ।आज यहाँ का मूल निवासी युवा, बेरोजगार होकर घूम रहा है, दूसरे राज्यों में काम करने के लिए जाता है तो सुरक्षा और जिम्मेदारी न होने के कारण उनसे क्रिटिकल कार्य करवाए जाते है जिसमे उनको अपना जान भी गवाना पड़ता है।



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