सुहागिन महिलाओं का मुख्य व्रत माना जाता हैं हरितालिका तीज,जानें व्रत के ये 7 नियम

हिन्दु धर्म की मान्यताओं में सुहागिन महिलाओं का मुख्य व्रत हरितालिका तीज माना जाता है।हरतालिका तीज व्रत भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है जो कि इस बार 2 सितंबर दिन सोमवार को है। हरतालिका तीज का व्रत महिलाएं अपने पति की दीर्घायु होने की कामना से करती हैं और कुवारी युवतियां सुंदर पति पाने के लिए यह व्रत रखती हैं। पंचाग के अनुसार, तृतीया तिथि रविवार को दिन 11:21 बजे के बाद शुरू होगी। जो सोमवार सुबह 9:01 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के कारण सोमवार को तृतीया तिथि शास्त्रों के अनुसार मानी जाएगी। भगवान शिवशंकर और पार्वती का पूजन सुहागिन व कुंवारी कन्याएं शाम 7:54 बजे तक पूजाअर्चन करना होगा। क्योंकि शाम 7:56 बजे से भद्रा लग जाएगा।

इस व्रत कठिन नियमों को चलते इसे सबसे ज्यादा कठिन व्रत माना जाता है।

जानें इसके कुछ खास नियम-
1- यदि आप एक बार हरतालिका तीज का व्रत रखती हैं, तो फिर आपको यह व्रत हर साल रखना होता है। किसी कारण यदि आप व्रत छोड़ना चाहते हैं तो उद्यापन करने के बाद अपना व्रत किसी को दे सकते हैं।

2- हरतालिका तीज व्रत के दौरान महिलाएं बिना अन्न और जल ग्रहण किए 24 घंटे तक रहती हैं। हलांकि कुछ इलाकों में इसके दूसरे नियम भी हो सकते हैं।

3- मान्यता है कि यह व्रत विधवा महिलाओं को नहीं करना होता।

4- इस व्रत में माता पार्वती और भगवान शिवशंकर की पूजा विधि विधान से की जाती है।

5- पूजा के पश्चात सुहाग की समाग्री को किसी जरूरतमंद व्यक्ति या मंदिर के पुरोहित को दान करने का चलन है।

6- इस व्रत के दौरान रात में जागरण करने का भी नियम है। यानी रात में सोया नहीं जाता।

7- अगले दिन भगवान शिव-पार्वती की पूजा करने बाद और प्रसाद बांटने के बाद ही प्रसाद ग्रहण किया जाता है। हालांकि हमारी सलाह कि सेहत ठीक न हो तो ऐसे कठिन नियमों को पालन करने में सख्ती नहीं बरतनी चाहिए।


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