रिहंद साहित्य मंच के स्थापना दिवस के अवसर पर किया गया काव्यगोष्ठी का आयोजन

28 अगस्त 2019

मुकेश अग्रवाल (संवाददाता)

कवियों की कविताएँ सामाजिक परिदृश्य का पटाक्षेय करती हैं – के एस मूर्ति

बीजपुर। एनटीपीसी की रिहंद परियोजना में मानव संसाधन विभाग के राजभाषा अनुभाग द्वारा आयोजित राजभाषा विशेष कार्यक्रम के तहत फिराक गोरखपुरी एवं रिहंद साहित्य मंच के स्थापना दिवस के अवसर पर बुधवार को परियोजना के प्रशासनिक भवन परिसर स्थित सृजन सम्मेलन कक्ष में काव्यगोष्ठी का आयोजन किया गया । काव्यगोष्ठी का शुभारंभ बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित मा0 सं0 विभाग के अपर महाप्रबंधक के एस मूर्ति ने परंपरागत ढंग से किया । अपने सम्बोधन में मूर्ति ने इस आयोजन में भाग लेने वाले रिहंद साहित्य मंच एवं अन्य कवियों के कविताओं की सराहना करते हुए कहा कि कवियों की कविताएँ सामाजिक परिदृश्य का पटाक्षेय करती हैं । जिसके माध्यम से समाज में हो रही अच्छाइयाँ एवं कुरीतियाँ लोगों के समक्ष स्पष्ट रूप से खुल कर आती हैं । उन्होने रिहंद साहित्य मंच को आगे बढ़ाने के लिए परियोजना प्रबंधन द्वारा यथोउचित सहयोग करने का आश्वासन भी दिया । काव्यगोष्ठी की समाप्ति पर मुख्य अतिथि ने सभी कवियों को पुरस्कार देकर सम्मानित भी किया ।

कौशलेश दूबे की अध्यक्षता में आयोजित काव्यगोष्ठी में सर्वप्रथम दीपक श्रीवास्तव ने मुझे पसंद एवं मुझे ना पसंद के संदर्भ में कविता सुनाते हुए कहा कि “अंदर से अमीर ज़िंदा ज़मीर” तथा देवी प्रसाद पाण्डेय ने शृंगार रस से ओत-प्रोत कविता “लगी है चोट जो दिल में इसे कैसे बताऊँ मैं” को सुनाकर वातावरण का रुख बदल दिया । अगली कड़ी में डी एस त्रिपाठी ने भारत में आतंकवाद मिटाने के बावत “भारत का बूढ़ा बच्चा जब बलिदानी बन जाएगा को सुनाकर सम्मेलन कक्ष में बैठे लोगों के अंदर देश प्रेम की भावना का संचार किया ।

कवि मंच का संचालन कर रहे मुकेश कुमार ने “खुले आसमां से हो बावस्ता”, अध्यक्षता कर रहे कौशलेश दूबे ने “रिहंद हमारा सबसे न्यारा”, तथा कार्यक्रम के मुख्य आयोजक प्रशांक चंद्रा ने “लौट के वो आया ना, आया न उसका खत ! उम्र भर का साथ का था वादा उसका ” को सुनाकर काव्यगोष्ठी में चार चाँद लगा दिया । अगली कड़ी में लक्ष्मी नारायण पन्ना द्वारा सु-मधुर स्वर में गाया गया शृंगार रस से युक्त कविता “वो प्यार कर गई या दिल के पार गई ” तथा अरुण ‘अचूक’ द्वारा पढ़ी गई कविता ” तुम्हारे साथ हम होते हमारे पास तुम होते ” ने हम किसी से कम नहीं की कहावत को चरितार्थ करते हुए लोगों द्वारा काफी सराही गई ।

पुनः आर डी दूबे ने आज के परिवेश को परिलक्षित करने वाली कविता, रामजी द्विवेदी ने कविता की परिभाषा को दर्शाने वाली कविता एवं राजीव कुमार श्रीवास्तव ने “तुम्हें पाने तुम्हें खोने तक मेरे पास कुछ रहा नहीं ” को सुनाकर श्रोताओं को तालियाँ बजाने पर बाध्य कर दिया । शत्रुजीत चौधरी ने “दो-दो दीप जलाएँ आज “, शैलेंद्र कुमार ‘अम्बर’ ने “नीर क्षीर विवेक ” तथा कल्लू राम विश्वकर्मा ने व्यंगात्मक कविता “यूं ही गाल बजाते रहिए भोपू सा चिल्लाते रहिए ” तथा मिथिलेश कुमार शर्मा ने “एक बार तुम मुस्कुरा करके तो देखो जिंदगी के गीत गुन गुनाकर के तो देखो ” को सुनाकर सम्मेलन कक्ष में बैठे हुए श्रोताओं को बाँधे रखा।

कार्यक्रम में आगंतुकों का स्वागत एवं धन्यवाद ज्ञापन काव्यगोष्ठी का संयोजन करने वाले वरिष्ठ प्रबंधक राजभाषा एवं जनसंपर्क प्रशांक चंद्रा ने किया । कार्यक्रम में मुख्य रूप से मानव संसाधन विभाग के विधि अधिकारी वासू प्रजापति एवं अन्य श्रोतागण उपस्थित थे ।



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