10 साल से कम उम्र के बच्चों को रात में ना दें दूध,बच्चों के दांतों को कर रहा हैं बीमार

रात में दूध पीने वाले बच्चों को दांतों की बीमारियों का खतरा 60 प्रतिशत तक अधिक रहता है। सबसे ज्यादा बच्चों को दांतों में कीड़े लगने की परेशानी होती है। डॉक्टरों ने 10 साल से कम उम्र के बच्चों को रात में दूध न देने की सलाह दी है। दिन में दूध पिला सकते हैं। यह जानकारी केजीएमयू दंत संकाय के कंजरवेटिव डेंटिस्ट्री एवं एंडोडोंटिक्स विभागाध्यक्ष डॉ. एपी टिक्कू ने दी।वह सेल्बी हॉल में दो दिवसीय इंडिया एसोसिएशन ऑफ कंजरवेटिव एवं एंडोडोंटिक्स नार्थ जोन पीजी कन्वेंशन को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा कि केजीएमयू में दांतों का आधुनिक इलाज उपलब्ध है। नई तकनीक से मरीजों को भी राहत मिली है। मरीजों को अस्पताल की दौड़ कम हुई है। इलाज भी सस्ता हुआ है। दांत व जबड़े की सेहत के लिए मोटा अनाज खाएं। गन्ना चूसें। जूस पीने के बजाए फल खाएं। केजीएमयू कुलपति डॉ. एमएलबी भट्ट ने भी संबोधित किया। उन्होंने भी लोगों से रात में ब्रश करने की सलाह दी।

समय पर कराएं दांतों का इलाज:
डॉ. एपी टिक्कू ने कहा कि दांतों का समय पर इलाज कराकर 80 प्रतिशत तक इम्प्लांट लगवाने से बच सकते हैं। दांतों में कीड़े लगने, खोखला होने या फिर सड़न की दशा में उसे निकलवाना नहीं चाहिए। कुछ डॉक्टर इम्प्लांट खापने के लिए दांत निकाल इम्प्लांट प्रत्यारोपित कर देते हैं। डॉक्टर इससे बचें। डॉ. नमिता शुक्ला ने कहा कि सुबह से ज्यादा जरूरी रात में ब्रश करना होता है क्योंकि रात में सोने के दौरान लार कम बनती है।

एक बार में आरसीटी संभव:
डॉ. अनिल चन्द्रा ने कहा कि आरसीटी आसान हो गई है। पहले दो से तीन दिन के अंतराल पर मरीज को पांच से छह बार अस्पताल बुलाना पड़ता था। अब माइक्रोस्कोप की मदद से आरसीटी एक से डेढ़ घंटे में हो रही है। एक बार में ही आरसीटी संभव हो गई है। अभी भी 80 से 90 प्रतिशत डॉक्टर पुरानी तकनीक से आरसीटी कर रहे हैं। वहीं मेरठ के डॉ. सचिन ने कहाकि यदि बच्चा मुंह खोलकर सो रहा है तो संजीदा हो जाएं। डॉक्टर को जरूर दिखाएं।

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