येदियुरप्पा मंत्रिमंडल में होंगे तीन उप मुख्यमंत्री

26 अगस्त 2019

कर्नाटक में तकरीबन एक हफ्ते के इंतजार के बाद मंत्रियों के बीच विभागों का बंटवारा हो गया । इस बार मुख्यमंत्री येदियुरप्पा को तीन उप मुख्यमंत्री दिए गए हैं जिनमें से एक लिंगायत एक वोक्कालीग्गा और एक दलित है।बुज़ुर्ग लिंगायत नेता बीएस येदियुरप्पा की नकेल कसने की तैयारी बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने पूरी तरह कर ली है. पहली बार उनको तीन उप मुख्यमंत्री दिए गए हैं । विधानसभा चुनाव में हारे लिंगायत नेता लक्ष्मण सावदी, जो विधानसभा मे ‘पोर्न गेट’ की वजह से सुर्खियों में आए थे, अब उप मुख्यमंत्री बनाए गए हैं. उन्हें ट्रांसपोर्ट पोर्टफोलियो भी दिया गया है ।

दूसरे उप मुख्यमंत्री हैं डॉ अश्वत नारायण. कहा जाता है कि इस वोक्कालीग्गा नेता ने जेडीएस-कांग्रेस की बगावत में अहम भूमिका निभाई थी । इन्हें उच्च शिक्षा और सूचना तकनीक विभाग दिया गया है. कर्नाटक में सूचना तकनीक और बायोटेक्नालॉजी का पोर्टफोलियो महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इस क्षेत्र में कर्नाटक देश में लीडर की भूमिका में है ।

तीसरे उप मुख्यमंत्री हैं दलित नेता गोविंद करजोल जिन्हें समाज कल्याण और पीडब्लूडी विभाग दिए गए हैं । गृह मंत्रालय येदियुरप्पा के भरोसेमंद लिंगायत नेता बसवराज भोमई को दिया गया है ।

पूर्व मुख्यमंत्री जगदीश शेट्टर को उद्योग विभाग सौंपा गया है. राज्य के पूर्व कानून मंत्री सुरेश कुमार प्राध्यमिक और माध्यमिक शिक्षा की जिम्मेदारी दी गई है । सीटी रवि को पर्यटन, कन्नड़ और संस्कृति विभाग दिया गया है. जोले शशिकला अन्नासाहेब को महिला एवं बाल विकास मंत्री बनाया गया है. अन्य सभी वे विभाग जो किसी मंत्री को नहीं दिए गए हैं, मुख्यमंत्री येदियुरप्पा के पास रहेंगे ।

मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने सोमवार की सुबह ही साफ कर दिया था कि जल्द ही मंत्रियों को उनके विभाग दे दिए जाएंगे ।

मामला कई मुद्दों पर अटका था । पहले बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने की इजाज़त येदियुरप्पा को देने में देर की, फिर तीन हफ़्तों बाद मंत्रिमंडल का विस्तार और पोर्टफोलियो के बंटवारे में भी देर हुई । जाहिर है तीन सदस्यों के बहुमत पर टिकी येदियुरप्पा की सरकार में जातीय और क्षेत्रीय समीकरण बनाने की कोशिश की गई है. कांग्रेस अब इस पर चुटकी ली रही है ।

प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता रिज़वान अरशद ने कहा कि अब तो साफ हो गया कि येदियुरप्पा जी सिर्फ एक कठपुतली हैं संघ और दिल्ली के हाथों की । एक रबर स्टाम्प और कुछ नहीं । यह कर्नाटक जैसे वाइब्रेंट राज्य के लिए अच्छा नहीं है ।


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