श्रीकृष्ण का जीवन -चरित्र मानवता को,दिखा सकता हैं सच्ची राह

24 अगस्त 2019

मनोज वर्मा (संवाददाता)

रेनुकूट। अनुकूल और प्रतिकूल परिस्थितियों में सांसारिक और आध्यात्मिकता के बीच अपने जीवन की सोलह श्रेष्ठ मानवीय कलाओं के द्वारा समन्वय और संतुलन के महान जीवन प्रबन्धन की कला सीखने वाले श्रीकृष्ण का जीवन-आदर्श वर्तमान सांसारिक परिस्थितियो में और अधिक प्रासंगिक और अनुकरणीय ही गया।आज जीवन मे विरोधाभासी परिस्थितिया तेजी से उत्पन्न हो रही हैं और इनमें समन्वय की कमी ही जीवन मे बढ़ रहे दुःख ,तनाव ,कटुता और सँघर्ष का मूल कारण है।

ऐसे समय मे सोलह श्रेष्ठ मानवीय कला सम्पन्न श्रीकृष्ण का जीवन -चरित्र मानवता को सच्ची राह दिखा सकता है ।वास्तव में ,समभाव और समदृष्टि प्राप्त करना ही जीवन मे उत्कष्टता की कटौती हैं। श्रीकृष्ण ने’ साक्षीदृष्टा’ होकर इस संसार मे जीवन जीने का जो अदभुत दर्शन सिखाया वह ही सांसारिक जीवन मे जीवनमुक्ति का मार्ग खोलता है तथा जीवन को दुःख और पापकर्म से मुक्त करता है।उक्त बातें विकास नगर स्थित ब्रह्माकुमारीज सेवाकेंद्र की मुख्य संचालिका ब्रह्माकुमारी सुमन बहन ने सेवाकेंद्र पर श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर आध्यात्मिक सन्देश देते हुए कही।

सेवाकेंद्र पर जन्माष्टमी की झांकी को भव्य एवं आकर्षण ढंग से सजाया गया था ।झांकी का उद्घाटन इस प्रोग्राम का उद्घाटन अमरेश सिंह पटेल (अध्यक्ष जिला पंचायत)सुरेश चंद्र शुक्ल ,मंत्री भाजपा ,डॉ अनुपमा साई हॉस्पिटल मुख्य संचलिका सुमन बहन ,राजीव शुक्ला हरिंद्र प्रधानाचार्य ने किया।इस प्रोग्राम में स्वागत नृत्य सृष्टि ने किया,उसके बाद मनीषा ,मनी,प्रियंसी,इसिप्टा,बुलबुल वर्तिका,अंशिका ,कृतिका,रितिका,नेहा,आर्य ने जन्माष्टमी प्रोग्राम पर डांस किया ।इस प्रोग्राम को सफल करने में बी के प्रतिभा सीता ,सरोज,कविता,साक्षी गोपाल ने किया।


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