पूर्व वित्त मंत्री को नहीं मिल सका जमानत, 26 अगस्त तक रिमांड में भेजने का फैसला सुनाया

22 अगस्त 2019

आईएनएक्स मीडिया केस में सीबीआई कोर्ट से पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम को बड़ा झटका लगा है । सीबीआई ने 5 दिनों की रिमांड की अपील की थी, जिसे कोर्ट ने स्वीकार करते हुए पूर्व वित्त मंत्री को 26 अगस्त तक रिमांड में भेजने का फैसला सुनाया है । इसके साथ ही चिदंबरम के परिवार और वकील को उनसे आधा घंटा रोज मिलने का वक्त दिया जाएगा. 26 अगस्त को जब उन्हें कोर्ट में पेश किया जाएगा तो उनका मेडिकल कराया जाएगा । हालांकि, सीबीआई अदालत ने सीबीआई के अधिकारियों को ताकीद की कि रिमांड के दौरान आरोपी की गरिमा को चोट नहीं आनी चाहिए ।

बता दें कि बुधवार की रात करीब सवा दस बजे चिदंरबरम को सीबीआई हिरासत में लिया था । जिसके बाद वह उन्हें सीबीआई मुख्यालय ले गई जहां चिदंबरम को औपचारिक तौर पर गिरफ्तार कर लिया गया । इसके बाद आज दोपहर ढाई बजे के करीब चिदंबरम को सीबीआई की विशेष अदालत में पेश किया गया । कोर्ट में करीब डेढ़ घंटे तक सुनावई चली।

सीबीआई की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और चिदंबरम की ओर से एडवोकेट कपिल सिब्बल और अभिषेक सिंघवी पेश हुए । हालांकि सीबीआई के सबूत के आगे कपिल सिब्बल और अभिषेक सिंघवी की दलीलें धरी की धरी रह गईं । आखिरकार कोर्ट को चिदंबरम को सीबीआई की हिरासत में भेजना पड़ा । अब सवाल यह है कि आखिर सीबीआई ने कौन से ऐसे सबूत पेश किए, जिनके चलते चिदंबरम को जमानत तक नहीं मिल पाई ।

चिदंबरम के खिलाफ सीबीआई के सबूत

आईएनएक्स मीडिया मामले में सीबीआई पी चिदंबरम से फॉरेन इन्वेस्टमेंट प्रोमोशन बोर्ड (FIPB) की मंजूरी और कार्ति चिदंबरम की कंपनी द्वारा ली गई कंसल्टेंसी फीस को लेकर पूछताछ कर रही है । सीबीआई का दावा है कि एडवांस स्ट्रैटेजिक कंसल्टिंग प्राइवेंट लिमिटेड (एएससीपीएल) और अन्य कंपनियों ने आईएनएक्स मीडिया से एफआईपीबी की मंजूरी के लिए पैसा लिया था । एएससीपीएल और अन्य कंपनियां को कार्ति चिदंबरम ने बनाया है ।

सीबीआई के मुताबिक कार्ति चिदंबरम और पी चिदंबरम ने आईएनएक्स मीडिया की मदद की. एफआईपीबी की मंजूरी के लिए आईएनएक्स मीडिया ने एएससीपीएल और अन्य कंपनियों को जेनेवा, अमेरिका और सिंगापुर स्थित बैंकों के जरिए भुगतान किया । इस मामले की जांच में बरामद हुए दस्तावेजों और ई-मेल से साफ होता है कि पैसे का भुगतान एफआईपीबी की मंजूरी के लिए दिया गया. उस समय पी चिदंबरम देश के वित्तमंत्री थे. उन्होंने एफआईपीबी की मंजूरी देने के लिए अपने पद का दुरुपयोग किया.

सीबीआई का यह भी दावा है कि एएससीपीएल और अन्य कंपनियों ने दिखावे के लिए फेक तरीके से क्रिएटिंग मीडिया कंटेंट, मार्केट रिसर्च के नाम पर कंसल्टेंसी उपलब्ध कराई. हालांकि पी चिदंबरम और आईएनएक्स मीडिया के बीच सीधे संबंध होने के कोई दस्तावेज बरामद नहीं हुए हैं.

इसके अलावा दिसंबर 2016 में ईडी ने सीबीआई को इस मामले में एक खत लिखा था, जिसमें कहा गया कि मामले की जांच में खुलासा हुआ है कि एएससीपीएल ने कंसल्टेंसी के नाम पर फंड लिया. इसका मकसद वित्त मंत्रालय से एफआईपीबी की मंजूरी दिलाना था. ईडी ने सीबीआई को लिखे खत में कहा था कि इसको लेकर एएससीपीएल ने कभी कोई कंसल्टेंसी और टेंडर एडवाइस भी जारी नहीं किया. ईडी ने यह भी बताया कि एएसपीसीएल पर कार्ति चिदंबरम का नियंत्रण है. इस कंपनी को कार्ति के फायदे के लिए ही बनाया गया ।

ईडी ने सीबीआई को बताया कि एएससीपीएल के परिसर से बरामद दस्तावजों में खुलासा हुआ कि आईएनएक्स मीडिया ने एएससीपीएल को 15 जुलाई 2008 को चेक के लिए भुगतान किया. आईएनएक्स मीडिया प्राइवेट लिमिटेड के एमडी और सीएफओ ने भी एएससीपीएल को भुगतान किए जाने की बात स्वीकार की. उन्होंने यह भी कहा कि एफआईपीबी की मंजूरी के लिए एएससीपीएल को पैसे का भुगतान किया गया था । उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इस चेक में इंद्राणी मुखर्जी ने दस्तखत किए थे. इसके बाद 11 नवंबर 2008 को आईएनएक्स न्यूज को वित्त मंत्रालय से मंजूरी मिल गई.


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