‘ईवीएम एप द वोटिंग मशीन’ द्वारा विद्यालय में हुआ बाल संसद का गठन

21 अगस्त 2019

विवेक मिश्रा (संवाददाता)

■ बच्चों में जागरूकता के लिए गांधी पीरामल फाउंडेशन ने की अनोखी पहल

■ बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए विद्यालय में पुस्तकालय की स्थापना

शाहगंज (सोनभद्र) । परिंदे परों से नहीं हौसलों से उड़ा करते हैं, मन में अगर कुछ कर गुजरने की चाहत हो तो बड़े से बड़ा काम छोटा दिखाई देने लगता है। जी हां ऐसा ही कुछ जज्बा गांधी फेलो पीरामल फाउंडेशन की ब्लॉक कोऑर्डिनेटर संस्कृति श्रीवास्तव ने करके दिखाया है। जहां पूरे देश में ईवीएम मशीन को लेकर तमाम राजनीतिक दल के नेता सवालिया निशान उठाते रहते हैं, वहीं घोरावल ब्लाक के प्राथमिक विद्यालय शाहगंज में बच्चो के स्टूडेंट्स लर्निंग आउटकम और गुणवत्ता बढ़ाने के लिए गांधी पीरामल फाउंडेशन ने ईवीएम एप द वोटिंग मशीन द्वारा बाल संसद का गठन कर पी.एस.शाहगंज में एक अनोखी पहल की है।

इस बाबत फाउंडेशन के ब्लॉक कोऑर्डिनेटर संस्कृति श्रीवास्तव ने बताया कि ईवीएम एप द वोटिग मशीन द्वारा बाल संसद का गठन प्राथमिक विद्यालय शाहगंज में किया गया। विद्यालय में बाल संसद का चुनाव संपन्न हुआ । जिसमे विद्यालय के शिक्षक और गांधी फेलो पिरामल फाउंडेशन के संरक्षण में पूरी चुनाव प्रक्रिया सम्पन्न कराई गई।

इस चुनाव में बच्चों को नोटा एवं आधुनिक चुनाव प्रकिया से अवगत कराया गया। स्कूल चुनाव आयोग के निर्देश का पालन निष्पक्षता पूर्वक किया गया इसका उद्देश्य विद्यालय में प्रधानमंत्री और मंत्री मंडल का विस्तार कर शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करना था।

बच्चों को भारतीय लोकतंत्र व्यवस्था का महत्व समझाना इन्हें सामाजिक विकास में भी मुख्य भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करना था। द जीरो पीरियड के कौशल विकास के लिए गांधी पिरामल फाउंडेशन द्वारा यह नई पहल है जिसमे बच्चो के रूची के अनुसार उन्हे अलग- अलग टीम मे बाँटा जाता है।

पी.एस.शाहगंज मे पेटिग (रंगसाज़ी), स्पोर्ट्स (गति), नाच/गाना(ध्वनि), भाषण कला (संवाद) और बागवानी (प्रकृति) वृक्षारोपण के महत्व को समझाया गया और मीड-डे मील के बाद प्रतिदिन 25 मीनट के लिए बच्चे अपने मन लायक गतिविधि मे हिस्सा लेते है। इसके परिणामस्वरूप बच्चो के अंदर कौशल के साथ-साथ लीडरशिप, सोचने और कल्पना करने की क्षमता विकसित होती है। जिससे बच्चे एक टीम भावना से प्रेरित होकर एकता और अनुशासन के बारे मे सीखते है।

यही नहीं विद्यालय में एक खुला पुस्तकालय भी बनाया गया है । पुस्तकालय की स्थापना के लिए विद्यालय के प्रधानाध्यापक कांता प्रसाद ने एक अलग से रूम उपलब्ध कराया जिससे एक भव्य पुस्तकालय की स्थापना हो सकी । यह एक ऐसा पुस्तकालय है जो सबसे अलग है इसमे बच्चे पढ़ने के साथ साथ किसी विषय पर चर्चा कर सकते है, इच्छा अनुसार बाहर बैठकर पढ सकते है और अपनी सोच अनुसार नवीन रचना कर सकते है। विद्यालय में एक कल्पना की दीवार भी बनाई गई है जहाँ बच्चे कुछ भी लिख कर या बना के दीवाल पर चिपका सकते है।

बच्चो को महापुरुषों व विद्वानो की बाते बताने के लिए एक “कोटेशन कार्नर” बनाया गया है। इस पुस्तकालय का एकमात्र उद्देश्य बच्चो मे “रिडिग हैबिट” सोचने की क्षमता और चर्चा करने की क्षमता विकसित करना है। इन सब क्रियाओं से विद्यालय के बच्चों में भी जागरूकता आई है। इस अनोखी पहल से विद्यालय भी इन दिनों सुर्खियों में है।



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