सोनभद्र शिक्षा विभाग की हाईटेक त्रैमासिक परीक्षा व्यवस्था, टीचरों के मोबाइल पर भेजें जा रहे प्रश्न पत्र

19 अगस्त 2019

आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)

* नेटवर्क पर डिपेंड है त्रैमासिक परीक्षा

* नेटवर्क फेल तो परीक्षा प्रणामी फेल

* बेसिक शिक्षा मंत्री ने स्कूल संमय पर लगाई थी रोक, सोनभद्र शिक्षा विभाग ने मोबाइल को ही कर दिया महत्वपूर्ण

* जुगैल, घोरावल, नगवा व बभनी, सागोबांध जैसे जगहों पर नेटकर्क को लेकर परेशान दिखे अध्यापक

सोनभद्र । जनपद सोनभद्र, एक ऐसा पिछड़ा जनपद जो सूबे को दूसरे नम्बर पर राजस्व देने वाला जनपद है । यहां खनिज संपदा से लेकर विद्युत गृह का अंबार है, जो आधे देश को रौशन कर रहा है लेकिन जनपद देश के 115 पिछड़े जनपदों में शामिल है यह भी कटु सत्य है ।
2014 में देश में मोदी सरकार बनने के बाद ऐसे तमाम पिछड़े जनपदों को इस दंश से बाहर निकालने के लिए नीति आयोग का गठन किया गया । नीति आयोग में 6 बिंदुओं को शामिल किया गया जिसमें शिक्षा भी शामिल है ।

नीति आयोग में शामिल जनपदों की मॉनिटरिंग पीएम से लेकर सीएम तक होती है । मगर बड़ा सवाल यह है कि मोदी सरकार की 2014 का कार्यकाल पूरा होने के बाद दूसरे कार्यकाल की शुरआत तक आखिर शिक्षा के क्षेत्र में सुधार क्यों नहीं हुए । सरकार सरकारी स्कूलों को बेहतर बनाने के लिए तमाम योजनाएं चला रही है और उनके लिए धन की कोई कमी नहीं । यूं कहें योगी सरकार में सरकारी स्कूलों में जितनी सुविधाएं दी गयी उन्हें सही तरीके से लागू किया जाय तो शायद बच्चों की संख्या बढ़ाने के लिए सर्व शिक्षा अभियान की रैली नहीं निकालनी पड़े । क्योंकि सुविधाओं को पाकर बच्चे खुद स्कूलों में एडमिशन के लिए लाइन लगाएंगे। मगर रिजल्ट इसका उल्टा है । अध्यापकों को घर घर जाकर बच्चों के एडमिशन के लिए निवेदन करना पड़ता है । इन सबके बावजूद सरकारी स्कूलों की दशा सुधरने का नाम नहीं ले रही ।
ताजा मामला प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में त्रैमासिक परीक्षा के समय देखा जा सकता है । योगी सरकार में इस बार परीक्षा का पेपर बच्चों को न देकर सीधे अध्यापक के मोबाइल पर भेज दिया गया और फिर अध्यापक उसे ब्लैक बोर्ड पर उतार पर परीक्षा ले रहे हैं । ऐसे में जहां अध्यापकों को पूरा पेपर ब्लैक बोर्ड पर उतारने में मशक्कत करनी पड़ रही है वहीं बच्चों को भी बोर्ड से देखकर परीक्षा देने मेहनत करना पड़ रहा हैं ।

सोनभद्र शिक्षा विभाग की हाईटेक परीक्षा प्रणाली पर सवाल खड़ा होना लाजमी भी है । हाईटेक तरीक़े से ली जा रही परीक्षा का नजारा वहां भी देखने को मिला जहां एक ही कमरे में, एक ही ब्लैक बोर्ड पर प्रश्न लिखकर सभी बच्चों को बिठाकर परीक्षा ले ली गयी ।
इतना ही नहीं उन स्कूलों पर यह हाईटेक परीक्षा व्यवस्था का क्या हस्र हुआ होगा जहां नेटवर्क की बड़ी समस्या है या टीचरों के पास एंड्रॉयड मोबाइल नहीं ।
सोनभद्र के शिक्षा विभाग ने न सिर्फ पूरे परीक्षा को मजाक बना दिया है बल्कि बेसिक शिक्षा मंत्री के बयान को भी नकार दिया जिसमें मंत्री अनुपमा जायसवाल ने कहा था कि स्कूलों में टीचरों के मोबाइल प्रयोग पर कार्यवाही होगी ।

ऐसे में अध्यापकों के लिए बड़ी मुसीबत यह बन गयी कि आखिर वे किसके आदेश का पालन करें ।
योगी सरकार में स्कूलों की दशा सुधारने के लिए बजट पानी की तरह बहाया जा रहा है ।

वावजूद इसके बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ0 गोरखनाथ पटेल का कहना है कि यह परीक्षा जनपद स्तर पर करायी जा रही है। समयाभाव और बजट न होने के कारण मैंने पेपर बनवाकर विकास खण्ड स्तर पर व्हाट्सएप के माध्यम से प्रश्न पत्र शिक्षकों तक पहुँचवा दिया । साथ ही शिक्षकों को ब्लैक बोर्ड पर प्रश्न पत्र लिख कर परीक्षा सम्पन्न कराने का निर्देश दिया गया।

बहरहाल योगी सरकार भले ही नीति आयोग में शामिल कर शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाने का प्रयास कर रही हो मगर जिन अधिकारियों और अध्यापकों कज़ भरोसे सरकार यह सपना देख रही है उसकी जमीनी हकीकत क्या है यह किसी से छिपी नहीं । अब सवाल यह उठता है कि क्या सोनभद्र कभी पिछड़े जनपद के दंश से बाहर निकल पायेगा ।


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