कजली तीज हैं बहुत महत्व, इस तरह करें पूजा, पढ़ें विशेष विधि


हरतालिका तीज व्रत करती महिलाओं के लिए कजरी तीज का बहुत महत्व है। यह कजली तीज के नाम से भी प्रचलित है। कजरी तीज भादो मास में कृष्ण पक्ष की तृतीया को मनाई जाती है। अगर अंग्रेजी कैलेंडर को देखें तो यह जुलाई व अगस्त के महीने में आती है। हरियाली जीत, हरितालिका तीज की तरह कजरी तीज भी सुहागिन महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण पर्व है।

कजली तीज के मौके पर महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं। जबकि कुंवारी कन्याएं अच्छे वर के लिए इस दिन व्रत रखती हैं। कजरी तीज के मौके पर जौ, गेहूं, चने और चावल के सत्तू में घी और मेवा को मिलाकर कई तरह के पकवान बनाए जाते हैं।

इस बार कजरी तीज 18 अगस्त को है। कजरी तीज का शुभ मुहूर्त 17 अगस्त के रात 10 बजकर 48 मिनट से शुरू हो जाएगा। इसके बाद 18 अगस्त तक रहेगा। इस दिन नीमड़ी माता की पूजा-अर्चना की जाती है। महिलाएं पूजन से पहले मिट्टी और गोबर की दीवार के सहारे एक तालाब जैसी आकृति बनाते हैं। इसके बाद नीम की टहनी को लगाकर दूध और जल डालते हैं। वहीं दिया भी जलाती हैं।

कजरी व्रत के दिन पूजा का विशेष महत्व है। पूजन के लिए सर्वप्रथम नीमड़ी माता को जल चढ़ाएं। इसके बाद रोली और चावल चढ़ाएं। नीमड़ी माता के पीछे दीवार पर मेहंदी, रोली और काजल की 13-13 बिंदिया ऊंगली से लगाएं। मेंहदी, रोली की बिंदी अनामिका अंगुली से लगाएं और काजल की बिंदी तर्जनी अंगुली से लगानी चाहिए। इसके बाद फल भी चढ़ाएं।


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