प्रदूषण से बचाने के लिए हैं ये आयुर्वेदिक उपाय


इन दिनों लोग वातावरण में फैल रहे स्मॉग या वायु प्रदूषण से जूझ रहे हैं। स्मॉग के प्रदूषक तत्व सांस के जरिए हमारे शरीर में पहुंच जाते हैं जो हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित होते हैं। ये कुछ समय बाद फेफड़ों की कार्यक्षमता को प्रभावित करते हैं साथ ही हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट अटैक, डायबिटीज, साइनोसाइटिस आदि स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकते हैं। बचाव के लिए अनेक आर्युवैदिक उपाय आइये जानते हैं
तुलसी का जूस पिएं:
पहले से बने-बनाए 10-15 मिलीलीटर तुलसी के जूस को पानी मिलाकर दिन में दो बार लें। यह आपकी सांस की नली या श्वसन तंत्र से प्रदूषक तत्व हटाने में सहायक है। चाहें तो घर में तुलसी के 5-6 पत्तों को पीस कर उसमें रस निकाल लें। इसमें एक चम्मच शहद मिलाकर ले सकते हैं।
’ 3 ग्राम पीपली को शहद के साथ मिलाकर ज्यादा से ज्यादा 7 दिन ले सकते हैं, लेकिन इसे बच्चों को नही देना चाहिए। इससे सहज सांस लेने में मदद मिलती है।
’ दिन में 2-3 चम्मच देसी घी फायदेमंद रहता है। घी शरीर के विषैले तत्वों को बाहर कर देता है।
’ श्वसन-नली बंद है तो पिपरमिंट ऑयल की 2-3 बूंदें या यूकेलिप्टस ऑयल की 4-5 बूंदें डाल कर दिन में दो बार 5 मिनट के लिए भाप लेना फायदेमंद साबित होता है।
’ नीम की पत्तियों को एक पतीले पानी में उबाल लें। इसे नहाने के पानी में मिलाकर नहाएं। यह त्वचा पर जमे प्रदूषकों को हटाता है और त्वचा को डिटाक्सिफाई करता है। संभव हो तो हफ्ते में 2-3 नीम की पत्तियां खा लें।
’ नियमित रूप से फुल-बॉडी मसाज शरीर के लिम्फैटिक सिस्टम को स्वस्थ बनाता है। सर्दियों में सरसों, ऑलिव ऑयल से मसाज कर सकते हैं,गर्मियों में नारियल तेल अच्छा रहता है। इससे रक्त में जमा टॉक्सिक बाहर निकलते हैं। रक्त संचार बेहतर होता है, ऑक्सीजन की आपूर्ति तेज होती है और शरीर की सफाई होती है।

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