फिल्म ‘जबरिया जोड़ी’ की समीक्षा,


बॉलीवुड फिल्म में बबली यादव (परिणीति चोपड़ा) हैं. वे वो करती हैं जो उनके मन में आए. एकदम निडर है. दूसरी तरफ हैं अभय सिंह (सिद्धार्थ मल्होत्रा) जो शादी और श्राद्ध दोनों करवाते हैं. अभय दबंग हैं और अपनी दबंगई झाड़ते नजर आते हैं. दोनों बचपन के दोस्त भी हैं, जिन्हें जवानी में मिलते ही प्यार हो जाता है.

बबली जो दो पल पहले अपने बॉयफ्रेंड के बेवफा होने का दुख मना रही थीं वो अभय को देखकर उनसे अपने प्यार का इजहार भी करती हैं और शादी के सपने भी सजाने लगती है. अभय बाबू सबका घर जबरदस्ती बसाते हैं, लेकिन अपनी बारी में डर जाते हैं.

अभय और बबली की कहानी पर बनी ये फिल्म शुरू होने के थोड़ी देर में ही एक जगह से दूसरी जगह पहुंच जाती है और उसमें सेंस बनना बंद हो जाता है. फिल्म की कहानी तो ढूंढनी मुश्किल थी ही उसपर सिद्धार्थ मल्होत्रा और परिणीति चोपड़ा की एक्टिंग भी किसी जुल्म से कम नहीं है. हां, बीच-बीच में संजय मिश्रा, जावेद जाफरी और अपारशक्ति खुराना आते हैं और आपका अच्छा फील करवाते हैं. फिल्म के पंच और जोक अच्छे थे हालांकि वो इस फिल्म बच नहीं सके.

डायरेक्टर प्रशांत सिंह क्या बनाने की कोशिश कर रहे थे, जबरिया जोड़ी को देखकर इसका अंदाजा लगाना बेहद मुश्किल है. फिल्म का विषय बढ़िया था, अगर इसकी कहानी को ढंग से पर्दे पर उतारा गया होता तो ये कमाल कर सकती थी. लेकिन फिल्म को देखकर साफ है कि मेकर समझ नहीं पाए कि इस कहानी के साथ न्याय कैसे करें. सिद्धार्थ और परिणीति के किरदारों की सिंपल कहानी को इतना उलझाया गया कि ये फिल्म ना हुई किसी के फोन की उलझी हुई हैंड्स-फ्री हो गई, सुलझने का सवाल ही पैदा नहीं होता. फिल्म के गाने ठीक हैं.

कुल-मिलाकर इस फिल्म को झेलना इतना मुश्किल है कि अगर कोई आपको बंदूक के जोर पर भी इसे देखने को बोले तो भी आप ऐसा ना कर पाएंगे. फिल्म का बॉक्स ऑफिस पर बेहद कामयाब होना काफी मुश्किल नजर आ रहा है. कुल मिलाकर लगता तो यही है कि सिद्धार्थ और परिणीति के खाते में जबरिया जोड़ी के रूप में एक और फ्लॉप फिल्म शुमार हो गई।


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