रोज सुनवाई से रामजन्मभूमि विवाद पर फैसला नवंबर में आना संभव

10 अगस्त 2019

उच्चतम न्यायालय के अयोध्या रामजन्मभूमि विवाद के मामले की हर हफ्ते सोमवार से शुक्रवार तक सुनवाई करने के फैसले से यह साफ हो गया है कि राजनैतिक रूप से संवेदनशील इस मामले का फैसला नवंबर के दूसरे हफ्ते से पहले आ जाएगा। यही नहीं, मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई 17 नवंबर को सेवानिवृत्त होने वाले हैं और उन्हें इससे पहले मामले में फैसला देना होगा।

48 दिन का कार्य समय : रोजाना सुनवाई करने से सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय पीठ के पास मंगलवार 13 अगस्त से 48 दिन का कार्य समय होगा। जानकारों के अनुसार यह समय पर्याप्त है क्योंकि इस मामले में एक पक्ष निरमोही अखाड़ा अपनी बहस पूरी कर चुका है। कोर्ट ने उससे जन्मस्थान पर उसके दावे के दस्तावेज मांगे हैं, जिसे देने में अखाड़े ने असमर्थता जताई है। उसने कहा कि यह दस्तावेज उसके यहां 1985 में पड़ी एक डकैती में चोरी हो गए। उसके दावे के प्रमाण निचली कोर्ट के फैसले में हैं। लेकिन कोर्ट ने अखाड़े को चेताया था कि दस्तावेज नहीं देने की स्थिति में वह अपने खतरे पर बहस करे।

प्रत्युत्तर के लिए एक मौका : सभी पक्षों की बहस पूरी होने के बाद उन्हें एक और मौका प्रत्युत्तर के लिए दिया जाएगा। कोर्ट पक्षों से यह भी कह सकता है कि प्रत्युत्तर लिखित में दे दें। ऐसा होने से प्रत्युत्तर देने में लगने वाला समय और घट जाएगा, जिससे कोर्ट के पास फैसला लिखने के लिए पर्याप्त समय बचेगा। पीठ ने पहले ही पक्षों से कहा है कि अपनी बहस और दलीलें स्वामित्व के दीवानी मुकदमे तक सीमित रखें। इस बात की पूरी संभावना है कि कोर्ट उन अपीलों पर विचार नहीं करेगा, जो मूल मामले में पक्ष नहीं थीं। मामले में 14 अपीलें दायर की गई हैं।

मामले में तोड़ी परंपरा
शीर्ष अदालत ने नियमित सुनवाई की परंपरा से हटकर अयोध्या विवाद में शुक्रवार को भी सुनवाई करने का फैसला किया था। शुक्रवार और सोमवार के दिन नए मामलों और लंबित मामलों में दाखिल होने वाले आवेदनों आदि पर विचार के लिए होते हैं। वहीं तीन दिन मंगलवार, बुधवार और गुरुवार को नियमित मामलों की सुनवाई होती है। तीन दिन वकील पुराने नियमित मामलों में बहस करते हैं और दो दिन नए मामले लेते हैं। मुस्लिम पक्ष के वकील ने नियमित सुनवाई को पांच दिन करने के फैसले का विरोध किया। हालांकि हिंदू पक्ष की ओर से इसका कोई विरोध नहीं किया गया।


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