पाकिस्तान नव की थार एक्सप्रेस सेवा रद्द

09 अगस्त 2019

जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म होने और उसका 2 केंद्रशासित प्रदेशों के रूप में पुनर्गठन किए जाने के बाद से ही पाकिस्तान तिलमिलाया हुआ है। बौखलाहट में वह एक के बाद एक कदम उठा रहा है। राजनयिक संबंधों का दर्जा घटाने, द्विपक्षीय व्यापार और समझौता एक्सप्रेस को रोकने के बाद अब उसने थार एक्सप्रेस सेवा को भी रद्द करने और दिल्ली-लाहौर बस सेवा को भी निलंबित करने का ऐलान किया है। दूसरी तरफ वह युद्ध की आशंका का हौवा भी खड़ा करने की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने भारत पर ‘युद्ध जैसी स्थिति’ तैयार करने का आरोप लगाया। दरअसल, भारत के आंतरिक मामले को लेकर उसकी चीख-चिल्लाहट को अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा अनसुना करने से उसकी हताशा और बेचैनी और ज्यादा बढ़ रही है।

थार एक्सप्रेस सेवा को रोका

पाकिस्तान ने शुक्रवार को घोषणा की कि वह थार एक्सप्रेस की सेवा रद्द कर देगा जो राजस्थान सीमा के जरिए भारत और पाकिस्तान के बीच चलती है। एक दिन पहले ही पाकिस्तान ने समझौता एक्सप्रेस रद्द कर दी थी और द्विपक्षीय संबंधों को कमतर करने का निर्णय किया था। रेल मंत्री शेख राशिद अहमद ने शुक्रवार को थार एक्सप्रेस की सेवा रद्द करने की घोषणा की और कहा कि शुक्रवार की देर रात अंतिम ट्रेन भारत के लिए रवाना होगी। यह जानकारी पाकिस्तान की आधिकारिक न्यूज एजेंसी एपीपी (असोसिएटेड प्रेस ऑफ पाकिस्तान) ने दी।

एजेंसी ने रेल मंत्री के हवाले से कहा, ‘जब तक मैं रेल मंत्री हूं थार और समझौता एक्सप्रेस की सेवाएं रद्द रहेंगी।’ थार एक्सप्रेस 18 फरवरी 2006 से जोधपुर के भगत की कोठी स्टेशन से कराची के बीच हर शुक्रवार की रात को चलती है। उससे पहले यह सेवा 41 वर्षों तक स्थगित रही थी। उन्होंने कहा कि 133 किलोमीटर लंबी नई पटरियां 13 अरब रुपये की लागत से बनी थी और अब इन पटरियों का इस्तेमाल थार कोयला परियोजना के लिए किया जाएगा। थार एक्सप्रेस राजस्थान सीमा के आर-पार रहने वाले लोगों के बीच लोकप्रिय रही है और उन पाकिस्तानी हिंदुओं की भी पसंदीदा रही है जो भारत आना चाहते थे। एक अनुमान के मुताबिक पिछले 13 वर्षों में चार लाख से अधिक यात्रियों ने इस रेलगाड़ी की सेवा ली है।
युद्ध जैसी स्थिति तैयार कर रहा भारत: इमरान
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने भारत पर पुलवामा आतंकी हमले के बाद की तरह ही ‘युद्ध के हालात’ बनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि भारत कश्मीर मुद्दे से दुनिया का ‘ध्यान हटाने’ के लिए ऐसा कर रहा है। पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकारों के एक समूह से गुरुवार को बात करते हुए खान ने दावा किया कि भारत पुलवामा की घटना के बाद जैसे हालात बनाने की कोशिश कर सकता है ताकि वह घाटी में हो रहे घटनाक्रम से दुनिया का ध्यान भटका सके।

एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने खान के हवाले से लिखा है, ‘खतरा वास्तविक है। हमें इस तरह की स्थिति पर जवाब देना होगा और हमने इसी तरह से दुनिया में देशों के बीच युद्ध शुरू होते हुए देखा है।’ पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसा लगता है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के मध्यस्थता की पेशकश से भारत ने कश्मीर के विशेष दर्जे पर तेजी से कदम उठाया। खान ने कहा कि युद्ध कोई विकल्प नहीं है लेकिन पाकिस्तान को दुनिया को यह बताने की जरूरत है कि कश्मीर में क्या चल रहा है। दूसरी तरफ, ‘युद्ध जैसी स्थिति’ वाली खान की टिप्पणी के संबंध में जब विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार से दिल्ली में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के लिए यह नई वास्तविकता देखने और भारतीय मामलों में हस्तक्षेप करना बंद करने का समय है।

भारतीय नौसेना ने तत्काल किसी भी अभियान में तैनाती के लिए अपने युद्ध पोतों को हाई अलर्ट पर रखा है। जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के ज्यादातर प्रावधानों को खत्म करने वाले और राज्य को दो केंद्र शासित क्षेत्रों में बांटने वाले सरकार के फैसले के बाद पैदा हुई स्थिति को देखते हुए नौसेना ने यह कदम उठाया है। रक्षा सूत्रों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सभी नौसेना स्टेशनों को किसी भी संभावित सुरक्षा चुनौती से निपटने के लिए हाई अलर्ट पर रखा गया है। सेना और भारतीय सेवा सेना भी सरकार के फैसले के बाद हाई अलर्ट पर है।

पाकिस्तान को नई हकीकत स्वीकार करनी चाहिए: भारत

पाकिस्तान की बौखलाहट और बढ़ती कूटनीतिक आक्रामकता के बीच भारत ने शुक्रवार को कहा कि पड़ोसी देश के लिए वक्त आ गया है कि वह नई हकीकत को स्वीकार करे और इसके अंदरूनी मामलों में हस्तक्षेप करना बंद कर दे। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा कि कश्मीर पर भारत के निर्णय के बाद पाकिस्तान ‘बेचैन’ है और इस्लामाबाद का मानना है कि क्षेत्र में विकास होने पर वह लोगों को गुमराह नहीं कर पाएगा। कुमार ने कहा, ‘पाकिस्तान के लिए वास्तविकता स्वीकार करने और भारत के अंदरूनी मामलों में हस्तक्षेप बंद करने का समय आ गया है।’



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