जेलों की सुरक्षा व्यवस्था दो लेयर में हो – मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

06 अगस्त 2019

* सुरक्षा में लगे लोगों की तय करें जवाबदेही – योगी

* सुनिश्चित करें कि मुलाकाती सीसीटीवी के सामने से ही गुजरें

लखनऊ । मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने कहा है कि कानून-व्यवस्था की बेहतरी के लिए जेलों की सुरक्षा को जहां तक संभव हो मजबूत करें। वहां दो लेयर में सुरक्षा व्यवस्था मुहैया कराएं। जिनपर सुरक्षा का भार है उनकी जवाबदेही तय करें। यह सुनिश्चित कराएं कि हर मुलाकाती अनिवार्य रुप से जेलों में लगे सीसीटीवी कैमरे के सामने से होकर ही गुजरे। समय-समय पर कैमरे के इनपुट का भी विश्लेषण करें। सेवा प्रदाता कंपननियों और केंद्र सरकार से बात करें कि जेलों के 100-150 मीटर के दायरे में मोबाइल का सिग्नल न मिले। इस संबंध में सुप्रीमकोर्ट में लंबित पड़े मुकदमें की प्रभावी पैरवी करें।

मंगलवार को लोकभवन में कारागार प्रशासन एवं सुधार विभाग की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि जो जेलें शहरों के बीचो–बीच आ गयी हैं उनकी जमीन बेशकीमती हो गयी है। इनको बेचकर शहर से 15-20 किलोमीटर दूर नयी जेल बनवाएं। इससे इतना पैसा मिले जाएगा कि जिन जिलों में अब तक जेल नही हैं वहां भी ये बन जाएंगी। अतिरिक्त पैसे से सुरक्षा को मजबूती देने के लिए अन्य संसाधन भी जुटाये जा सकेंगे।

छह माह में दिखना चाहिए सुधार

मुख्यमंत्री योगी ने यह भी निर्देश दिया कि कम खर्चे में बेहतर सुरक्षा के लिहाज से बहुमंजिली बैरकें बनाएं। जेल में तैनात कर्मचारियों और वहां बंद अपराधियों का गठजोड़ तोड़ने के लिए हर दो महीने में नये कर्मचारियों को तैनात करें। छह माह में जेलों की व्यवस्था में सुधार दिखने चाहिए। इसके लिए उन्होंने प्रतिनियुक्ति पर 1500 पुलिस कर्मियों की तत्काल नियुक्ति और भोजन की गुणवत्ता सुधारने के भी निर्देश दिये।

समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने श्रावस्ती्, सिद्धार्थनगर, संतकबीरनगर, इटावा और प्रयागराज में निर्माणाधीन जेलों के काम की प्रगति‍ और कार्यदायी संस्था के बारे में भी जानकारी ली। उन्होंने निर्देश दिया कि किसी भी निर्माण के पहले उसकी प्राथमिकता और औचित्य को सुनिश्चित करें। कार्यदायी संस्था से मानक, काम शुरू करने ओैर समाप्त होने के समय के बाबत करार करें। हर महीने की प्रगति का लक्ष्य तय करने के साथ इसकी समीक्षा कर इसे सुनिश्चत भी कराएं। न होने पर कार्यदायी संस्‍था के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें। समीक्षा के दौरान एक बार फिर निर्माण निगम की लेट लतीफी की बात आयी। मुख्यमंत्री ने संस्था के साथ बैठक कर निर्माण की अवधि तय करने का निर्देश दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हर माह जिला निगरानी समिति की बैठक होती है। इस बैठक में डीएम और एसएसपी जिला जज से बात कर जेलों में ही न्यायिक अधिकारियों से सुनवायी की बात भी सुनिश्चत कराएं। राजनैतिक मुकदमें अनावश्यक रुप से उत्पीड़न का जरिया बन गये हैं। इनको समाप्त कराने के लिए भी कदम उठाएं। भ्रष्टाचार के आरोप में जो कर्मचारी बर्खास्त या निलंबित हुए हैं उनको कोर्ट से राहत न मिले इसके लिए ऐसे मुकदमों की प्रभावी पैरवी करें।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त, शिक्षक दिवस 5 सितंबर, पंडित दीनदयाल उपाध्याय और दो अक्टूबर को गांधी जयंती पर तय संख्या में कैदियों को रिहा करें। 70 साल से अधिक, बीमार और अशक्‍त कैदियों की रिहाई के बारे में भी सोचें।

बैठक के दौरान यहां राजधानी में प्रस्तावित पुलिस एवं फारेंसिक साइंस विश्वविद्यालय की स्था्पना पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि इसके लिए 144 एकड़ जमीन उपलब्ध है। विश्‍वविद्यालय के साथ यहां एक प्रशिक्षण केंद्र भी स्थापित करें। मैं चाहता हूं कि हर पुलिस कर्मी का लोगों के साथ वहीं व्यवहार हो जो प्रयागराज कुंभ और वाराणसी के प्रवासी दिवस के समय था। मुख्यमंत्री ने हर रेंज में फारेंसिक लैब की स्थापना और उनमें डिग्री एवं डिप्लोमा के पाठ़यक्रम शुरू करने के भी निर्देश दिये।
बैठक में मुख्य सचिव डॉ अनूप चंद पांडेय, डीजीपी ओपी सिंह, अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश अवस्थी , प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री एसपी गोयल और संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।


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