अयोध्या विवाद मामला : मध्यस्थता पैनल ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट को बंद लिफाफे में सौंपा अंतिम रिपोर्ट

01 अगस्त 2019

अयोध्या जमीन विवाद को बातचीत से सुलझाने के लिए गठित मध्यस्थता पैनल ने गुरुवार को उच्चतम न्यायालय को बंद लिफाफे में अंतिम रिपोर्ट सौंप दी। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच जजों की बेंच ने 11 जुलाई को एक याचिका पर पैनल से यह रिपोर्ट मांगी थी।

सभी पक्षों के बीच सोमवार को दिल्ली स्थित उत्तर प्रदेश सदन में आखिरी बैठक हुई थी। इससे पहले 18 जुलाई को मध्यस्थता पैनल ने शीर्ष कोर्ट को स्टेटस रिपोर्ट सौंपी थी। तब मुख्य न्यायाधीश ने कहा था कि अभी मध्यस्थता की रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर नहीं लिया जा रहा, क्योंकि ये गोपनीय है। पैनल जल्द अंतिम रिपोर्ट कोर्ट को सौंप दे।

उन्होंने कहा था कि अगर इसमें कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला तो हम 2 अगस्त को रोजाना सुनवाई पर विचार करेंगे। उसी दिन सुनवाई को लेकर आगे के मुद्दों और दस्तावेजों के अनुवाद की खामियों को चिन्हित की जाएंगी।

बता दें, राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद मामले के एक पक्षकार गोपाल सिंह विशारद की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता कमेटी से रिपोर्ट तलब की. गुरुवार को मध्यस्थता कमेटी ने अपनी रिपोर्ट कोर्ट में पेश की. इस प्रगति रिपोर्ट को सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की संविधान पीठ ने देखा ।

रिपोर्ट को देखने के बाद बेंच ने मध्यस्थता कमेटी को 31 जुलाई तक का समय दिया है । इसके बाद 2 अगस्त को ओपन कोर्ट में मामले की सुनवाई होगी. माना जा रहा है कि 2 अगस्त को भी सुप्रीम कोर्ट मध्यस्थता कमेटी से प्रगति रिपोर्ट तलब कर सकती है. इस प्रगति रिपोर्ट के आधार पर सुप्रीम कोर्ट फैसला लेगा ।

पक्षकार ने कोर्ट से की थी सुनवाई की मांग

पक्षकार गोपाल सिंह विशारद ने अपनी याचिका में कहा था कि मध्यस्थता कमेटी के नाम पर विवाद सुलझने के आसार बेहद कम हैं, क्योंकि इसमें तो सिर्फ समय बर्बाद हो रहा है, इसलिए कोर्ट मध्यस्थता कमेटी खत्म कर स्वयं सुनवाई करके मामले का निस्तारण करें ।

69 सालों से विवाद, 11 संयुक्त सत्र के बाद भी मध्यस्थता विफल?

गोपाल सिंह के वकील पीएस नरसिम्हा ने चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की पीठ के सामने कहा था कि यह विवाद पिछले 69 सालों से अटका पड़ा है और मामले को हल करने के लिए शुरू की गई मध्यस्थता का रुख सकारात्मक नजर नहीं आ रहा है । 11 संयुक्त सत्र आयोजित किए जा चुके हैं, लेकिन ऐसा लगता है कि कोई निर्णय नहीं लिया जा सका है । यह विवाद मध्यस्थता के जरिए सुलझाना मुश्किल है।

जस्टिस कलीफुल्ला की अध्यक्षता में बनी कमेटी
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुआई वाली पांच जजों की संविधान पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस कलीफुल्ला की अध्यक्षता में मध्यस्थता कमेटी बनाकर इस मसले को बातचीत के जरिए आपसी सहमति से ही सुलझाने की पहल की थी । पहले शुरुआत में कमेटी को दो महीने यानी 8 हफ्ते दिए गए, फिर ये अवधि अगले 13 हफ्तों यानी 15 अगस्त तक के लिए बढ़ा दी गई थी. अब इसे 31 अगस्त कर दिया गया है ।


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