डॉ संजय सिंह का कांग्रेस हुआ मोह भंग, बीजेपी का थाम सकते हैं दामन

30 जुलाई 2019

पंडित जवाहर लाल नेहरू के समय से ही अमेठी राज परिवार का नाता नेहरू-गांधी परिवार से करीबी और उतार-चढ़ाव भरा रहा है । 2019 के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी को अमेठी संसदीय सीट पर हार का मुंह देखना पड़ा । इसके बाद अमेठी राजपरिवार की 34वीं पीढ़ी के राजा डॉ. संजय सिंह का भी कांग्रेस से मोहभंग हो गया है ।

उन्होंने कांग्रेस को एक बार फिर अलविदा कह दिया है और अब बीजेपी का दामन थामने जा रहे हैं. संजय सिंह ने कांग्रेस छोड़ने के साथ-साथ राज्यसभा सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया है ।

संजय सिंह 1998 में अमेठी संसदीय सीट से कांग्रेस के कैप्टन सतीश शर्मा को हराकर सासंद चुने गए थे । इसके बाद वो अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में केंद्रीय मंत्री रहे । राहुल गांधी के कांग्रेस में एंट्री करने के बाद उन्होंने बीजेपी छोड़कर कांग्रेस में वापसी की । 2009 के लोकसभा चुनाव में संजय सिंह सुल्तापुर सीट से सांसद चुने गए थे ।

संजय सिंह 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस से नाराज हो गए थे, जिसके बाद पार्टी ने उन्हें असम से राज्यसभा भेजा था । इसके चलते सुल्तानपुर सीट से उनकी दूसरी पत्नी अमिता सिंह चुनाव लड़ी थीं, लेकिन वो जीत नहीं सकीं । हालांकि संजय सिंह की पहली पत्नी गरिमा सिंह मौजूदा समय में अमेठी से बीजेपी की विधायक हैं ।

संजय सिंह की पत्नी अमृता सिंह ने भी कांग्रेस छोड़ दी है । अमृता सिंह ऑल इंडिया प्रोफेशनल कांग्रेस (यूपी) की अध्यक्ष थीं. संजय सिंह ने कहा, ‘1984 से कांग्रेस के साथ रिश्ता है ।

सोनिया गांधी के खिलाफ भी चुनाव लड़ा

1999 में भी सिंह भाजपा के टिकट पर अमेठी से मैदान में थे। इस बार उन्हें सोनिया गांधी ने करीब तीन लाख मतों से पराजित कर दिया था। इसके बाद सिंह कांग्रेस में शामिल हो गए। 2009 में कांग्रेस ने उन्हें सुल्तानपुर से उम्मीदवार बनाया। इस चुनाव में उन्होंने बसपा के मोहम्मद ताहिर को करीब 98 हजार मतों से पराजित किया। कांग्रेस को 25 साल बाद सुल्तानपुर में जीत दिलाई। 2014 में कांग्रेस ने संजय सिंह को असम से राज्यसभा भेज दिया। उनका कार्यकाल अप्रैल 2020 में पूरा होना था।


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