बाल विकास विभाग ने चलाया विशेष अभियान

25 जुलाई 2019

राजीव दुबे (संवाददाता)

– छोटे बच्चो को पानी नही केवल मां का दूध : पी0के0 सिंह

मिर्जापुर। बाल विकास परियोजना विभाग द्वारा जिले के समस्त केन्द्रो पर सात दिवसीय विशेष अभियान चलाया जा रहा है। समस्त केन्द्रो पर ऐसी महिलाओं को बुलाया जा रहा है, जिनके बच्चे 6 माह से भी छोटे हैं,जो अपने बच्चो का देखभाल तो अच्छी तरह से कर लेती है परन्तु कुछ महिलाये अब भी पुराने रीति रिवाज व भ्रांतियों के कारण अपने 6 माह से छोटे बच्चे को पानी के साथ-साथ गाय या बकरी का दूध, शहद के साथ-साथ कई अन्य तरल पदार्थ पिला देती है। इस तरह की प्रवृत्ति बच्चे के स्वास्थ्य के लिए बहुत ही हानिकारक है। जिससे बच्चो को उल्टी, दस्त, बुखार और अन्य बीमारियां घेर लेती है और बच्चे कुपोषित श्रेणी में आ जाते है। इसकी रोकथाम के लिए जिला कार्यक्रम अधिकारी पी0के0 सिंह ने जिले के सभी केन्द्रो पर पानी नहीं केवल मां का दूध अभियान चलाया गया है। अभियान के अन्तर्गत प्रत्येक केन्द्र पर आंगनबाड़ी कार्यकत्र्री अपने क्षेत्र के छः माह से छोटे बच्चो के घर-घर जाकर उनके माता-पिता, दादा-दादी को जागरूक करने का काम कर रही है। इस दौरान वे पानी या अन्य पदार्थ पिलाने के नुकसान के बारे में भी विस्तृत रूप से चर्चा करेगी। जिससे क्षेत्र में जागरूकता बढ़ेगी। इस अभियान को सफल बनाने के लिए जनपद के सभी आंगनबाड़ी केन्द्रों पर गृह भेंट, पोषण बैठक, मेहदी प्रतियोगिता, पोस्टर पेंटिग, रैली और दीवाल लेखन आदि से समाज को जागरूरक करने का काम किया जा रहा है। जिला कार्यक्रम अधिकारी बाल विकास एवं पुष्टाहार ने बताया कि इन लक्षणों के आधार पर कुपोषण बच्चो की पहचान किया जाता है। कुपोषण के लक्षणो में वसा की कमी, दैनिक कार्यो को करने में दिक्कत, जल्दी-जल्दी बीमार पड़ना, थकान, उदासीनता व वजन का कम होना सहित अनेक कारण होते है। जनसाधारण आदमी आंगनबाड़ी केन्द्रो पर बच्चो का वजन कराकर कुपोषण की पहचान आसानी से कर सकता है। इसके अलावा आशा कार्यकत्र्रीयों एवं एएनएम के द्वारा बच्चो के बाये हाथ के उपरी हिस्से की मोटाई नापकर भी कुपोषण की पहचान की जाती है। पिछले वर्ष जनपद में 38 कुपोषित बच्चे पाये गये थे।

अपने शहर के एप को डाउनलोड करने के लिए क्लिक करे |  हमें फेसबुक,  ट्विटर,  और यूट्यूब पर फॉलो करें|
Back to top button