घोरावल नरसंहार कांड : 53 साल से होती रही गलतियां, आखिर 10 की गई जान, पढ़े जिम्मेदार कौन ?

21 जुलाई 2019

आनन्द कुमार चौबे/राजकुमार गुप्ता (संवाददाता)

– 2 करोड़ की थी जमीन

– हर टेबल पर होती रही गलतियां

– आखिर किसका था दबाव

– क्या जांच में आएगा 53 साल का इतिहास

– अधिकारियों ने मुख्यमंत्री तक को किया गुमराह, पोर्टल पर दी झूठी रिपोर्ट

सोनभद्र । जमीनी विवाद में हुए नरसंहार घटना के पांचवें दिन आज सीएम योगी सोनभद्र पहुंच रहे हैं । सुबह 11 बजे म्योरपुर से सीधे उभ्भा गांव जाएंगे जहां नरसंहार में मारे गए मृतक व घायलों के परिजन हैं। सीएम योगी उस गांव में आज पहुंचेंगे जहाँ कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी पहुंचना चाहती थी मगर उन्हें नहीं जाने दिया गया। जिसके बाद राजनीति गरमा गई और तभी से आरोप प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया । कांग्रेस ने तो मुख्यमंत्री से इस्तीफा देने की मांग भी कर डाली। आदिवासी जाति के लोगों के मारे जाने पर राजनीति वोट बैंक की भी है। बीजेपी नेताओं ने प्रियंका के दौरे को महज राजनीति बताया था। वहीं आज जब सीएम योगी स्वंम घटना स्थल जा रहे हैं तो पूरे देश की निगाह इस बात पर टिकी रहेगी कि सीएम निरीक्षण के बाद प्रथम दृष्टया क्या प्रतिक्रिया देते हैं और किसे दोषी मानते हैं । क्योंकि सीएम ने पहले ही कांग्रेस को घेरते हुए इसकी नींव 1955 में रखे जाने की बात कह चुके है ।

सीएम का दौरा इसलिए और महत्वपूर्ण है क्योंकि सीएम ने एंटी भू माफिया के तहत ऐसे ही जमीनों के निस्तारण की बात कही थी लेकिन जिस तरह से प्रशासन की लापरवाही व मिलीभगत से इस खेल को अंजाम दिया गया उन सभी पर क्या कार्यवाही होती है।

बड़ा सवाल यह है कि यदि सीएम योगी 1955 की बात करते हैं तो क्या कार्यवाही भी 1955 से लेकर अब तक के अधिकारियों पर होगी, क्योंकि गलती हर उस टेबल से हुए है जहां-जहां से यह फ़ाइल गुजरी।


इस पूरे प्रकरण पर पीड़ित पक्ष के वकील नित्यानंद का कहना है कि वे इस केस को लेकर 2017 से जुड़े। उनका मानना है कि कई ऐसे टर्निंग पॉइंट हैं जो नियम को ताख पर रखकर काम किया गया। उन्होंने वर्तमान घटना को लेकर दो टर्निंग पॉइंट का जिक्र किया कि यदि यह नहीं होता तो शायद यह घटना नहीं होती । 2017 से लगातार इस भूमि विवाद को देखने वाले अधिवक्ता नित्यानंद का मानना है कि 27 फरवरी 2019 को तत्कालीन एआरओ के ऑर्डर ने इस विवाद को जन्म दिया । यदि एआरओ इस ऑर्डर को करने से पहले मौके पर जाकर देखा होता तो शायद वे भी ऑर्डर नहीं करते और उनका भी मन बदल जाता। नित्यानंद का कहना है कि दूसरा टर्निंग पॉइंट 6 जुलाई 2019 की है जब तत्कालीन जिलाधिकारी ने बिना लोवर कोर्ट के पत्रावली तलब किये आपत्ति खारिज कर दिया जिससे प्रधान पक्ष को बल मिला। सरकारी रिकार्ड के मुताबिक लगभग 2 करोड़ के सौदे ने प्रधान पक्ष को इस कदर उन्माद कर दिया था उसे गलत और सही कुछ भी नहीं दिख रहा था और आखिरकार 17 जुलाई को कुछ ऐसा हुआ जिसकी कल्पना शायद ही किसी ने की होगी। 30-35 ट्रैक्टरों से भरकर लोग मौके पर पहुंच गए पर प्रशासन को भनक तक नहीं चल सका। सारी इंटेलिजेंस सारी खुफिया तंत्र फेल हो गया और वही हुआ जो प्रधान चाहता था। मुख्यमंत्री ने भले ही सीओ, इंस्पेक्टर व सिपाहियों समेत एसडीएम घोरावल को निलंबित कर दिया है मगर अभी भी कड़ी में तमाम ऐसे लोग हैं जो इस घटना के लिए पूरी तरह से जिम्मेदार हैं और वे यदि बच गए तो शायद मृतक परिवार सरकार को कभी माफ नहीं कर पाएगा।

अब देखने वाली बात यह है कि 53 साल के इस लम्बे अंतराल में कितने अधिकारियों पर गाज गिरती है । बहरहाल आज सीएम योगी आदिवासियों के आंसू पोछने जा रहे हैं। सबकी नजर इस बात पर होगी कि योगी जब पत्रकारों से रूबरू होंगे तो उनका नजरिया क्या होगा और कितनों के गाज गिरती है।


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