घोरावल हत्याकांड मामला : घटना के चौथे दिन उम्भा पहुँचे जनप्रतिनिधि, चेक का किया वितरण

20 जुलाई 2019

आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)

– घटना के बाद पहली बार पहुंचे क्षेत्रीय विधायक

– पूरी फोर्स के साथ पहुंचे गांव

– ग्रामीणों ने दबी जुबान से कहा, नेता वोट मांगने अकेले आते हैं मगर जीत के बाद पूरी बारात लेकर

– कई दिनों से नहीं जल रहा गांव में चूल्हा

– एक मात्र स्कूल भी छावनी में तब्दील

– 144 धारा के बाद पूरा बार्डर है सील

सोनभद्र । जमीन विवाद को लेकर महाभारत की कहानी और टीवी सीरियलों में देखा था मगर जमीन के लालच इस कदर किसी को हैवान बना देगा यह शायद किसी ने नहीं सोचा होगा।

17 जुलाई को घोरावल थाना क्षेत्र के उभ्भा गांव में जिस तरीके से कानून व्यवस्था की धज्जियां उड़ी, उसकी कल्पना शायद सीएम योगी ने भी नहीं की होगी। जिन अधिकारी व कर्मचारियों पर सीएम योगी भरोसा कर प्रदेश को उत्तम प्रदेश व रामराज का सपना देख रहे थे वही अधिकारी व कर्मचारियों की लापरवाही व भ्रष्टाचार ने महाभारत करा दिया। आज चेक लेकर उम्भा गांव पहुंचे अधिकारी व जनप्रतिनिधियों का सीना चौड़ा दिखा, शायद इसलिए कि भले ही पहले आंसू पोछने नहीं आ सके लेकिन आज खाली हाथ नहीं बल्कि चेक लेकर आये हैं । यदि घटनाक्रम पर गौर करें जिम्मेदार लोगों की कलई खुल गयी।

घटना का पहला दिन –

घटना के बाद सूचना पर एसपी घटना स्थल पर पहुंचे और उनका बयान आया कि 7-8 लोग ही घायल हुए हैं । वहीं जिला अस्पताल में दुर्व्यवस्था का आलम यह था कि 108 नं0 एम्बुलेंस की सहायता से घायलों को जिला अस्पताल लाया जाता है जहाँ एम्बुलेंसकर्मियों और पुलिस के इंस्पेक्टर से लेकर सिपाही तक गाड़ी से मृतकों व घायलों को स्ट्रेचर पर लादना व अंदर भर्ती करना पड़ा। आधे घण्टे बाद सीएमओ ने कहा कि बात करता हुँ और लापरवाही मिली तो कार्यवाही होगी । इसके बाद सीएमएस अस्पताल पहुंचते हैं । दुर्व्यवस्था पर पत्रकारों का जबाब देते हुए कहा कि लंच टाइम है, आते होंगे । पुलिस ने जवान लगातार अपनी ड्यूटी निभाते रहे लेकिन स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी लंच टाइम के बाद ही अस्पताल पहुंचे ।
अब तक लगभग 9 शव पहुंचे के बाद जिलाधिकारी भी जिला अस्पताल पहुंचे, डॉक्टरों से मुलाकात की और सहज तरीके से मीडिया को बताया कि मौत का आंकड़ा सब आने कब बाद ही बताया जा सकेगा लेकिन घटना के कारण जांच के बाद ही आ सकेगा ।

घटना का दूसरा दिन –

घटना के दूसरे दिन सुबह से ही मीडिया का गांव में जमावड़ा लग्न शुरू हो गया । ओवी वैन से लेकर संपादक तक गांव में पहुँचकर लोगों की बातें सुनी और उसे दिखाया और पढ़ाया लेकिन दो सीओ व कुछ इंस्पेक्टर के अलावा पुलिस तथा पीएसी के जवानों के अलावा कोई भी सरकारी कर्मचारी व स्थानीय जनप्रतिनिधि घटना स्थल पर नहीं पहुंचा । कांग्रेस के विधायक ने आकर जरूर लोगों से बातचीत की और भरोसा दिलाया ।

घटना का तीसरा दिन –

तीन दिनों से गांव पर मातम छाया हुआ था लेकिन कोई भी जनप्रतिनिधि नहीं पहुंचा, केवल समाज कल्याण अधिकारी अपनी रिपोर्ट व फार्म भरवाते नजर आए। और ग्रामीण शाम तक कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी का इंतजार करते रहे । लेकिन धारा 144 के कारण सभी पार्टियों को आधे रास्ते से बैरंग लौटना पड़ा ।

घटना का चौथा दिन –

आज भी सुबह से लोग प्रियंका गांधी का इंतजार करते दिखे, बाद में कुछ परिवार खुद के साधन से चुनार पहुंचकर प्रियंका गांधी से मुलाकात की । जिसके बाद मामला शांत हुआ और अधिकारी जनप्रतिनिधियों के साथ गांव में जाकर सहायता राशि का चेक मृतक परिवारों के आश्रितों को दिया । इस दौरान घटना के बाद पहली बार गांव पहुंचे जनप्रतिनिधि ग्रामीणों से आंख नहीं मिला पा रहे थे।


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