वायुसेना प्रमुख ने कहा- भारतीय वायुसेना किसी भी तरह के युद्ध के लिए तैयार

16 जुलाई 2019

एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ ने मंगलवार को कहा कि भारतीय वायुसेना किसी भी तरह के युद्ध के लिए तैयार है, चाहे यह करगिल जैसा संघर्ष हो, या किसी आतंकी हमले का जवाब, या फिर पूर्ण युद्ध हो। धनोआ ने ‘ऑपरेशन सफेद सागर के 20 वर्ष होने के अवसर पर एक सेमिनार को संबोधित करते हुए करगिल संघर्ष के दौरान वायुसेना द्वारा की गई कार्रवाई को याद किया। वह उस समय 17वीं स्क्वाड्रन के कमांडिंग अफसर थे।

उन्होंने कहा कि यह पहली बार था जब मिग-21 लड़ाकू विमानों ने पर्वतीय क्षेत्र में रात के दौरान हवा से जमीन पर बमबारी की। करगिल से पाकिस्तानी घुसपैठियों को खदेड़ने के लिए चलाए गए ‘ऑपरेशन विजय के तहत वायुसेना ने ‘ऑपरेशन सफेद सागर चलाया था।

धनोआ ने 1999 में अभियान की सीमाओं तथा संघर्ष के दौरान मुश्किलों से निपटने के लिए वायुसेना द्वारा अपनाए गए नए तौर-तरीकों के बारे में बात की। उन्होंने कहा कि करगिल युद्ध के बाद हुए घटनाक्रमों ने वायुसेना की क्षमता को बदल दिया है जिससे वह किसी भी तरह के हवाई खतरे से निपट सकती है। वायुसेना प्रमुख ने कहा, ”भारतीय वायुसेना किसी भी तरह का युद्ध लड़ने को तैयार है, चाहे यह पूर्ण युद्ध हो, या करगिल जैसा संघर्ष हो, या फिर किसी आतंकी हमले का जवाब हो।

बालाकोट ने दिखाया आईएएफ की मारक क्षमता

भारतीय वायुसेना के अध्यक्ष बीएस धनोआ ने मंगलवार को इस बात पर जोर देते हुए कहा कि 26 फरवरी को पाकिस्तान के बालाकोट में हमला भारतीय वायुसेना की एक निश्चित दूरी से सटीक हमले के क्षमता को दर्शाता है।

ऑपरेशन सफेद सागर (करगिर युद्ध के दौरान लड़ाई के वक्त भारतीय वायुसेना की तरफ से दिया गया कोड) के 20 वर्ष होने के मौके पर आयोजित एक सेमिनार के दौरान एयर चीफ मार्शल धनोआ ने कहा कि बालाकोट हमले ने यह साबित किया कि भारतीय वायुसेना के पास ऑपरेशन को पूरी ताकत के साथ अंजाम देने की पूरी क्षमता थी। जिसे लंबी प्लानिंग और समावेशन से हासिल किया गया है।

उन्होंने क्षमता बढ़ाने के लिए नींव रखने को लेकर अपने पूर्ववर्तियों को की तारीफ करते हुए इस बात जोर देकर कहा- “पिछले कुछ वर्षों के दौरान यह बहुत बड़ा बदलाव था।”

पाकिस्तान के बालाकोट स्थित जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) के आतंकी शिविर पर भारतीय हमला पुलवामा आत्मघाती हमले के जवाब में किया गया था। पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर किए गए हमले में अर्धसैनिक बलों को 40 जवान शहीद हो गए थे।

इस हमले में भारतीय वायुसेना के मिराज-2000 का इस्तेमाल किया गया था, जिसने इजरायल के बने स्पाइस 2000 बम्ब से तीन ठिकानों पर हमले किए थे। इसकी सबसे खास बात ये है कि यह निशाना बनाकर कम नुकसान करते हुए छत को छेद करते हुए अंदर तक जाता है और उसके बाद विस्फोट होता है।


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