जनपदवासियों से डीएम ने वर्षा जल संरक्षण का उपाय करने का किया आह्वान

08 जुलाई 2019

आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)

सोनभद्र । जल के बिना जीवन की कल्पना ही नही की जा सकती है, जल प्रकृति का एक अनिवार्य घटक है। साफ पानी इंसान, पशु-पक्षी, जीव-जन्तु एवं वनस्पतियों की जिन्दगी के परम आवश्यक है, इस अनमोल दौलत के बचाव/संरक्षण के उपायों को हम सभी को पूरी तत्परता के साथ करते हुए जन आन्दोलन का रूप देना होगा। जिलाधिकारी अंकित कुमार अग्रवाल ने हो रही बरसात पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि ईश्वर की महान कृपा से जिले में अच्छी बरसात हो रही है, जिससे शुद्ध पेयजल के समस्या के समाधान के साथ ही खेती-बारी का काम भी शुरू हो गया है। उन्होंने ईश्वर की कृपा पर आभार व्यक्त करते हुए जिले के नागरिकों से वर्षा के जल को संरक्षित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि जनपद के नागरिक वर्षा के हर बूद को संरक्षित करके जिले के सभी क्षेत्र को सालों साल सिचाई/दैनिक उपयोग के साथ ही शुद्ध पेयजल हेतु आत्म निर्भर करें, सरकारी मशिनरी के साथ ही आम नागरिक में इच्छाशक्ति पैदा करने की ज़रूरत है, ताकि पौधरोपण करते हुए वर्षा जल को प्यार के साथ संरक्षित किया जा सके। उक्त अपील जिलाधिकारी अंकित कुमार अग्रवाल ने सरकारी मशीनरी के पदाधिकारियों के साथ ही जिले के जनप्रतिनिधियों, प्रबुद्ध नागरिकों, स्वयं सेवी संगठनों, प्रिन्ट एवं इलेक्ट्रानिक्स मीडिया के प्रतिनिधियों के साथ ही आमजनता का आह्वान् किया है कि वे जन आन्दोलन का रूप भू-जल संरक्षण को दें, ताकि गिरते हुए जल स्तर को रोका जा सके, जनजागरूकता बिना यह सम्भव नही है , लिहाजा तालाबों, पोखरों, बाउलियों में वर्षा के पानी को पूरी तरीके से संरक्षित करने मेंं मदद करें। किसान भाई अपने खेतों का पानी खेत में अच्छी मेड़ बनाकर रखें, ताकि अधिकाधिक पानी खेतों में संरक्षित हो और जल का स्तर बना रहें, जिससे आने वाले दिनों में हैण्डपम्प वगैरह पानी न छोड़ने पाये। जिलाधिकारी ने कहाकि जल के बिना जीवन की कल्पना नही की जा सकती, प्रकृति में भू-जल का भण्डार सीमित है ,वैसे तो पृथ्वी पर 72 प्रतिशत मार्ग जल है, शेष 28 प्रतिशत स्थल जल है, परन्तु, 72 प्रतिशत का 97 प्रतिशत जल खारा तथा लवणी है जो समुद्र के रूप में है जिसका उपयोग कृषि एवं पेयजल के लिए उपयोग नही होता, शेष 3 प्रतिशत मीठा जल में 2 प्रतिशत हिमानी तथा नमी के रूप में है उसे विशेष तकनीकि के ज़रिये उपयोग किया जा सकता है । इसमें भी मात्र 0.6 प्रतिषत भू-जल ही हम उपयोग कर पाते हैं, शेष 0.4 प्रतिशत जल जलाशय, नदी तालाब के रूप में है। प्रदेश में 75 प्रतिशत सिंचाई तथा 80 प्रतिशत आबादी अपने रोज़मर्रा के प्रयोग मे तथा पेयजल हेतु भू-जल पर निर्भर है । इसी पानी से कल कारखाने भी संचालित होते है। इन परिस्थितियों में जल संरक्षण को संजोना हम सभी का परम दायित्व है। जल संरक्षित करके हम सभी लोग पुनीत कार्य के पात्र बनें। उक्त जानकारी सूचना विभाग के नेसार अहमद ने दी।


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